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जाली नोटों के अवैध धंधे से जुड़े लोगों को मिल रहा 'चायनीज' सहारा, एटीएस ने किया सनसनीखेज खुलासा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 09 Oct 2018 10:33 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
जाली नोटों के अवैध धंधे से जुड़े लोगों चायनीज सहारे की दरकार होती है। ऐसे लोग स्टांप पेपर व चीन निर्मित कलर प्रिंटर की मदद से अपने मंसूबों में कामयाब होते हैं। इसका खुलासा जाली नोटों के साथ तीन आरोपियों को मऊ से गिरफ्तार कर एटीएस ने किया। गिरफ्त में आए आरोपियों के सरगना मोहम्मद मंसूर के नेपाल के बीरगंज कनेक्शन को एटीएस खंगाल रहा है। आशंका जताई गई है कि इसी तरह से पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी स्कैन कर जाली नोट तैयार किए जा रहे होंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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दो हजार, पांच सौ, दो सौ और पचास रुपये के जो नोट बाजार में मौजूदा समय में उपलब्ध हैं उनकी डिजाइन, सुरक्षा लाइन और वाटर मार्क खास तरीके का है। इस वजह से जाली नोट तैयार कर पाना आसान नहीं रह गया है। एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल के जो भी लोग नेपाल से जाली नोट यहां लाकर खपाते थे नोटबंदी के बाद उन्हें खासी निराशा हाथ लगी। गिरफ्तार मोहम्मद मंसूर भी उन्हीं लोगों में से एक था और बीरगंज से जाली नोट लाकर मऊ, आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर में खपाता था।
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ऐसे में अब जालसाज पांच सौ और दो हजार के नोट को स्कैन कर चीन निर्मित प्रिंटर की मदद से 10 और 20 रुपये के स्टांप पेपर पर जाली नोट बनाते हैं। इन जाली नोट पर हरे रंग की सुरक्षा लाइन जो टेढ़ा करने पर नीला दिखाई देती है और वाटर मार्क बनाना आसान नहीं होता है। इस वजह से उसे पूर्वांचल के देहात क्षेत्रों में खपाया जाता है। बाकी सब कुछ हूबहू और कागज कड़क होने के कारण ग्राम्यांचल के लोग आसानी से इन्हें ले लेते हैं और कोई शक भी नहीं करता है।
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इस संबंध में एटीएस की वाराणसी इकाई के प्रभारी निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि नेपाल के बीरगंज और मऊ का कनेक्शन ध्वस्त किया गया है। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से अन्य जिलों की भी निगहबानी की जा रही है और ऐसे मामले सामने आए तो कार्रवाई में देर नहीं की जाएगी।
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fake currency notes
जाली नोटों के नेपाल कनेक्शन को काफी हद तक एटीएस सहित अन्य एजेंसियों ने कमजोर कर दिया है। मगर, पश्चिम बंगाल का मालदा कनेक्शन अब भी चुनौती बना हुआ है। बांग्लादेश की सीमा से सटे इस जिले के 20 से ज्यादा गांवों से अब भी पाकिस्तान निर्मित जाली नोटों की खेप उत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों में पहुंच रही है। दरअसल, मालदा से जाली नोटों की जो खेप आती है उन्हें खपाने वालों को 50 प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा मिलता है।