गंगा का सुरम्य किनारा रविवार की रात गायन, वादन की सरताज संगीत हस्तियों की मौजूदगी से यादगार बन गया। सुरों की मल्लिका पद्मभूषण आशा भोसले आशा भोसले ने न चाहते हुए भी फिल्म ‘मेरा साया’ में गाए अपने मशहूर गीत- झुमका गिरा रे... पर सुर लगाकर काशी के लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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पार्श्व गायिका आशा भोसले मंच पर सिर्फ सम्मान के लिए पहुंची थीं लेकिन उन्होंने जब माइक संभाला तो सुर लगाने लग गईं। ‘प्रेम में तोहरे ऐसी पड़ी हूं....’, ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को...’ की जब उन्होंने प्रस्तुति शुरू की तो तालियों की बौछार के साथ दर्शक दीर्घा से हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। फिर उन्होंने- ‘शंकर भंडारी भोले, मस्तक पर चंद्र विराजे...’ और फिर आखिरी नगमा- ‘पिया तू अब तो आ जा...’ सुनाकर संगीत प्रेमियों को मुग्ध कर दिया।
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चहुंओर हर-हर महादेव के जयघोष और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पार्श्व गायक हरिहरन ने भी गजलों के बाद ठुमरी की कशिश से संगीत प्रेमियों का दिल जीता।
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हरिहरन ने महामृत्युंजय मंत्र से शुरुआत की। इसके बाद- दिले नादां तुझे हुआ क्या है... फिल्म ‘रोजा’ के नगमे- रोजा जानेमन... की प्रस्तुति से उन्होंने भीड़ को झुमा दिया। इसके बाद- बाहों के दरमियां दो प्यार मिल रहे हैं... और ठुमरी- रूठ गए मोरे बांके सांवरिया... सुनाकर वाहवाही बटोरी।
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भैंसासुर राजघाट पर नृत्य और गायन की प्रस्तुतियों के बीच आंधी के साथ गरज-चमक और बूंदाबांदी से एकबारगी आयोजकों के चेहरे मुरझा गए थे लेकिन घाट की सीढ़ियों पर खचाखच उमड़े श्रोता टस से मस नहीं हुए।