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यूपी के इस जिले में मिले 38 सौ साल पुराने अवशेष, नदी किनारे बसी थी सभ्यता, देखें तस्वीरें

Fri, 19 Apr 2019 12:15 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली Published by: Sayali Maurya Updated Fri, 19 Apr 2019 12:15 PM IST
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Archaeology department of BHU find 38 hundred year old remains in chandauli

कितना रोमांचक लगता है यह सोच कर कि हजारों साल पहले मानव जीवन कैसे बसा होगा! कैसे इंसान ने अपने जीवन को सुगम बनाने के लिए जद्दोजहद की होगी! एक ऐसी ही पुरानी सभ्यता के बारे में पता लगाया है बीएचयू के पुरातत्व विभाग ने। उत्तर प्रदेश के एक जिले में 38 सौ साल पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं। बीएचयू के पुरातत्व विभाग की इस खोज में यह बात सामने आई है कि लगभग 4 हजार साल पहले तक पूर्वांचल में पुरा मानव पाया जाता था। देखें आगे की स्लाइड्स में...

Archaeology department of BHU find 38 hundred year old remains in chandauli

38 सौ वर्ष पूर्व चंदौली जिले के लतीफशाह बंधे के आसपास मानव बस्ती आबाद थी। बीएचयू के पुरातत्व विभाग की ओर से कराई गई खुदाई में सात सौ ईसा पूर्व से लेकर 18 सौ ईसा पूर्व के मानव जीवन के अवशेष मिले हैं।

Archaeology department of BHU find 38 hundred year old remains in chandauli

इन अवशेषों में नील मार्जित और कृष्ण मार्जित मृद भांड सहित लौह काल के प्रारंभिक अवशेष तथा पत्थर के औजार, कच्चे लोहे की कीले, फसल काटने की हसियां, भाले, शीशे की चूड़ियां प्राप्त हुई हैं। 

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Archaeology department of BHU find 38 hundred year old remains in chandauli

खुदाई अभियान के डायरेक्टर प्रो. प्रभाकर उपाध्याय ने बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास कला, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने पांच मार्च से लतीफशाह में खुदाई शुरू कराई। खुदाई में चार हजार वर्ष पुरानी सभ्यता के निशान मिले हैं। 

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Archaeology department of BHU find 38 hundred year old remains in chandauli

प्रो. प्रभाकर ने बताया कि साढ़े चार मीटर तक की खुदाई में 50 कच्चे लोहे की भट्ठियां जो लौह अयस्क को गलाने में प्रयुक्त होती थी पाई गई हैं। कच्चे लोहे के बाणाग्र, चाकू, कीलें, छेनी, हथौड़ी, कुल्हाड़ी तथा फसल काटने की हसियां तथा भाले तथा गांगेय क्षेत्र के प्रथम चरण के विकास के दौर की शीशे की चूड़ियां एवं हड्डियों के औजार तथा पत्थर के हथौड़े, सील, लोढ़े, लघु पाषाण उपकरण, पत्थर के मनके प्राप्त हुए हैं। इनसे नदी किनारे की सभ्यता और लौह काल को समझने में मदद मिलेगी।

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