पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक(Air strike) कर के शहीदों को 12 दिनों के अंदर ही भारतीय वायु सेना ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पाकिस्तान और पीओके(POK) में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविरों पर भारतीय वायु सेना के हमले और इसमें कई आतंकियों की मौत पर वाराणसी के तोफापुर गांव के लोग खुशी से झूम उठे। लेकिन शहीद रमेश की मां ने कहा कि मुझे खुशी नहीं हुई। देखें आगे की स्लाइड्स में...
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ramesh yadav
- फोटो : amar ujala
14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शहीद वाराणसी के तोफापुर निवासी रमेश यादव के परिजनों और ग्रामीणों का कहना था कि 12 दिन बाद उनके माटी के लाल की शहादत व्यर्थ नहीं गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) की सरकार ने दृढ़ता दिखाई और वायु सेना के जांबाजों ने बहादुरी दिखाकर पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया। इस दौरान गांव में भारत माता की जय और हर-हर महादेव का उद्घोष भी हुआ।
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शहीद रमेश के परिजन और ग्रामीण मंगलवार सुबह से ही टीवी स्क्रीन पर टकटकी लगाए हुए थे। मासूम बेटे आयुष को गोद में लेकर बैठी शहीद की पत्नी रेनू ने कहा कि अब जाकर कलेजे को ठंडक मिली है...। कहते ही रेनू सिसकने लगीं। फिर, खुद को संभालते हुए बोलीं कि ऐसी कार्रवाई तब तक होनी चाहिए, जब तक पाकिस्तान से आतंकियों के कुनबे का सफाया न हो जाए...। मोदी जी कार्रवाई जारी रखिएगा...। बेटा जब जवान होगा तो उसे भी भारत मां की रक्षा के लिए सेना में भेजूंगी।
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वहीं, शहीद की तस्वीर लेकर उनकी मां राजमती देवी बेसुध बैठी हुईं थीं। राजमती देवी ने कहा कि अभी मैं खुश नहीं हई...। जैसे हमरे रमेश को आतंकवादियों ने मारा था वैसे ही मोदी जी उन सब आतंकवादियों को मार के बदला लेंगे तब मुझे खुशी मिलेगी...। हमारे कलेजे का टुकड़ा तो चला गया लेकिन अब और किसी की कोख न सूनी हो। कहते ही मां की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह गया।
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शहीद के पिता श्याम नारायण यादव ने कहा कि वायु सेना की कार्रवाई से खुश है। मगर, उपाय ऐसे हों कि देश के किसी और परिवार का बेटा न शहीद हो। शहीद के बड़े भाई राजेश यादव ने कहा कि वायु सेना की कार्रवाई बहुत ही शानदार है। शहीद का भाई होने के नाते सरकार मुझे भी सेना में भर्ती करे ताकि मैं भी देश सेवा के लिए काम आ सकूं।