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ग्राउंड रिपोर्ट: गंगा की धारा के बीच बने रेत के टीले पर दफनाए गए सैकड़ों शव, कुत्ते घसीट कर ले जा रहे अंग

Tue, 11 May 2021 10:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 11 May 2021 10:08 PM IST
सार

संक्रमण के डर से पंडा, दाह संस्कार कराने से बच रहे हैं। अधिकांश शवों को रेत में दबाया जा रहा है। घाट पर जगह कम पड़ी तो नदी के बीच रेत के टीले पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

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Hundreds of bodies buried on sand dunes built between the Ganga stream
शवों को नोचते कुत्ते - फोटो : amar ujala
कोरोना से हो रही मौतों से इन दिनों उन्नाव में बीघापुर तहसील के बक्सर घाट पर अंतिम संस्कार के लिए रेला लगा है। संक्रमण के डर से पंडा, दाह संस्कार कराने से बच रहे हैं। अधिकांश शवों को रेत में दबाया जा रहा है। घाट पर जगह कम पड़ी तो नदी के बीच रेत के टीले पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। आसपास बस्ती और गांवों में रहने वाले लोग डरे हुए हैं। एसडीएम ने बताया कि शवों का अंतिम संस्कार सुरक्षित तरीके से ही होना चाहिए, वह मामले को दिखवाएंगे।


 
Hundreds of bodies buried on sand dunes built between the Ganga stream
गंगा नदी के बीच बने टीले में दफन शव - फोटो : amar ujala
बीघापुर तहसील के बक्सर घाट पर उन्नाव जिले के अलावा पड़ोसी जिला रायबरेली और फतेहपुर जिले से भी लोग शवों का अंतिम संस्कार करने इसी घाट पर पहुंचते हैं। इस समय प्रतिदिन 90 से 120 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। कोरोना के चलते पंडा भी दाह संस्कार कराने से बच रहे हैं। श्मशान घाट पर मौजूद डोम, नदी के किनारे गड्ढे खोदकर शवों को दफना कर अंतिम संस्कार करा रहे हैं। हालत यह है कि नदी के किनारे जगह कम पड़ने से अब शवों को नाव से नदी के बीच ले जाकर नदी के बीच बने रेत के टीलों पर दफनाया जा रहा है। हालत यह है कि अब गड्ढे खोदने की जगह नहीं मिल रही है।

 
Hundreds of bodies buried on sand dunes built between the Ganga stream
नहीं बची और शव दफनाने की जगह - फोटो : amar ujala
एक दूसरे पर दफनाए गए शवों को कुत्ते खींचकर इधर उधर फैला रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। एसडीएम दयाशंकर पाठक ने बताया कि शवों का अंतिम संस्कार सुरक्षित तरीके से किया जाना चाहिए। शव नदी में प्रवाहित करने पर पूरी तरह से रोक है। अगर लोग असुरिक्षत तरीके से शवों को बालू और रेत में दबा रहे हैं तो उसे दिखवाया जाएगा।

 
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Hundreds of bodies buried on sand dunes built between the Ganga stream
गंगा के बीच दबे हुए सैकड़ों की संख्या में शव - फोटो : amar ujala
कुत्ते, गांव तक ले जा रहे शव अंग
बक्सर घाट पर बेतरतीबी से दफनाए गए शवों को कुत्ते नोच और खींच रहे हैं। कई बार शव के अंग खींचकर गांवों के अंदर तक ले आते हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। बक्सर के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान रामप्रसाद चौरसिया के प्रतिनिधि रामबदन ने बताया कि पहले तो रोजाना 150 से 200 तक शवों का यहां अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इधर कुछ दिनों से संख्या कुछ कम हुई है। बताया कि प्रशासन को सुरक्षित तरीके से शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी चाहिए।

 
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Hundreds of bodies buried on sand dunes built between the Ganga stream
प्रशासन को कानों कान नहीं भनक - फोटो : amar ujala
गंगा का जलस्तर बढ़ा तो बिगड़ेंगे हालत
अगर गंगा का जलस्तर बढ़ा तो बक्सर श्मशान घाट के और रेत के टीलों पर दफनाए गए हजारों शव, खुल जाएंगे। पानी के साथ बहकर दूर तक जाएंगे और तेजी से संक्रमण फैलेगा। बक्सर निवासी राजराम, शिवगोविंद, रामेंद्र, शिवकुमार आदि ने बताया कि अब तो गंगा पुल से भी निकलने में डर लगता है। तेज दुर्गंध से संक्रमित होने का डर बना रहता है।
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