लखनऊ कोर्ट में कुख्यात संजीव जीवा की हत्या के बाद बृहस्पतिवार दोपहर पैतृक गांव आदमपुर में उसका कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। बड़े बेटे तुषार ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान कई थानों की पुलिस मौजूद रही। अंतिम संस्कार स्थल पर पुलिस ने सीमित संख्या में ही लोगों को जाने दिया।
संजीव का शव पहुंचने से पहले ही बृहस्पतिवार सुबह उसके पैतृक आवास पर परिजन और रिश्तेदार जुटने शुरू हो गए थे। इसके साथ ही एसपी ओपी सिंह के साथ कई थानों की फोर्स भी गांव में तैनात कर दी गई। जगह-जगह पुलिस तैनात रही। ग्रामीणों को संजीव जीवा के मकान पर जाने से भी पुलिस ने रोक दिया। परिवार के लोग और खास रिश्तेदार ही घर तक पहुंच सके।
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संजीव जीवा।
- फोटो : अमर उजाला
इसके साथ ही अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों की लिस्ट भी पहले ही तैयार कर ली गई थी। इसमें नाम पते के साथ उनके मोबाइल नंबर और आईडी पुलिस ने लिए। अंतिम संस्कार में पहुंचे कई बुजुर्गों और युवाओं को पुलिस ने वापस लौटा दिया। करीब पौने तीन बजे शव गांव पहुंचा और पौने चार बजे शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों में पुलिस-प्रशासन के प्रति गुस्सा दिखाई दिया। अंतिम संस्कार स्थल पर भी महिला परिजन कुछ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कर्मियों से उलझ गईं।
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विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
पायल नहीं कर पाई पति के अंतिम दर्शन
संजीव जीवा की मौत के बाद उसकी पत्नी पायल भी अपने पति के अंतिम दर्शन नहीं कर पाई। शव गांव पहुंचने से पहले चर्चा थी कि पायल ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी से राहत देने के लिए अर्जी लगाई है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। परिजनों ने पायल का इंतजार किए बिना ही संजीव जीवा का अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार संजीव जीवा के खेत की भूमि में किया गया।
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विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
शव पहुंचने से कुछ देर पहले पहुंचे बच्चे
संजीव जीवा का शव गांव पहुंचने से कुछ देर पहले उसके बच्चे अपनी बुआ के साथ गांव पहुंचे। पुलिस ने उनकी गाड़ी भी गांव के मुख्य मार्ग पर ही रोक दी। वहां से उन्हें पैदल ही अंदर जाना पड़ा। इस दौरान सभी बच्चों और रिश्तेदारों के चेहरे मास्क से ढके हुए थे।
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संजीव जीवा।
- फोटो : अमर उजाला
ज्यादातर ग्रामीणों ने कभी संजीव जीवा को देखा ही नहीं
अपराध की दुनिया में संजीव जीवा जितना चर्चित नाम था, अपने गांव के लोगों के लिए भी उतना ही अंजान था। ज्यादातर ग्रामीणों ने संजीव जीवा का चेहरा भी कभी नहीं देखा। शव गांव में पहुंचने पर ग्रामीण उसका चेहरा देखने के लिए उसके घर की तरफ चले तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस पर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति भी की। उनका कहना था कि वह सामाजिक प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें रोक दिया।