बिजनौर के मुंडाखेड़ी गांव के दीपक की हत्या की गई या फिर उसने आत्महत्या की? पुलिस इस गुत्थी में उलझ गई है। लेकिन इतना जरूर है कि पूरे मामले में दीपक बिजनौर पुलिसकर्मियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया।
UP: बिलखती रही दीपक की प्रेमिका, जमकर किया हंगामा, दरोगा ने बताई सच्चाई, आखिर क्यों देर तक दबाया मामला
उत्तर प्रदेश के शामली में पुलिस कस्टडी में आत्महत्या के जानकारी लगते ही दीपक की प्रेमिका का बुरा हाल हो गया।
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चंडीगढ़ के अंबाला से लेकर शामली तक दीपक ने एक दो नहीं, बल्कि दस से अधिक बार पुलिस को चेतावनी दी थी कि यदि उसे युवती से अलग करने का प्रयास किया तो वह जान दे देगा, पुलिस ने उसकी चेतावनी को अनदेखा किया।
युवती के परिजनों और अन्य ने भी युवक के चेतावनी देने के बयान पुलिस के समक्ष दिए हैं। यदि दीपक फंदे पर खुद लटका तो दरोगा उसका शव खुद ही उतारकर थाने क्यों पहुंच गए। सूचना देकर पुलिस को मौके पर क्यों नहीं बुलाया।
दरोगा बोला-मैं डर गया था
घर के अंदर दीपक का शव देखकर एक बार तो मैं पूरी तरह से डर गया था। मुझे मेरी वर्दी जाने का डर सता रहा था, इसलिए मैंने पहले जिंदा होने की आशंका के चलते उसे अस्पताल ले जाने की ठानी मगर अन्य लोगों ने मौत की बात कहीं तो उसे सीधे कोतवाली लेकर आ गया। ये बातें दरोगा सुनील कुमार ने बताईं।
बताया कि सुबह लड़की का चाचा जागा तो उसने देखा कि कमरे की लाइट बंद है जबकि वे लाइट खोलकर सोए हुए थे। पास से ही दीपक को गायब पाया। उन्होंने सूचना दी। वह कमरे से बाहर आए तो युवक का शव सीढियों पर लगी लोहे की एंगल पर लटका था।
किसी तरह लोगों की मदद से शव को उतारा। उसके जिंदा होने की संभावना को लेकर अस्पताल ले जाना चाहा लेकिन सभी ने कहा कि युवक मर चुका है। जिस पर मैं भाई की कार में शव को लेकर कोतवाली पहुंचा और मामले की जानकारी दी। मेरी गलती रही। शायद मैं युगल को घर पर न ले जाकर कोतवाली ले जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। मैं जिंदगीभर खुद को माफ नहीं कर सकूंगा।
महिला सिपाही बोली- मुझे जानकारी नहीं
महिला सिपाही अनु ने पुलिस को बताया कि वह घटना के समय लड़की के साथ नीचे के कमरे में सोई हुई थी, जिसके कारण उसे कोई जानकारी नहीं है। बाद में दीपक की मौत की जानकारी जरूर मिली थी।