अमर उजाला लाइव: हर पल खतरे में रहती है जान, तस्वीरों में देखिए यूपी की जर्जर इमारतों का हाल
बनते ही दरकने लगी थीं स्कूल की दीवारें
शामली में जिला मुख्यालय पर भैंसवाल रोड पर करीब आठ साल पहले प्राथमिक विद्यालय भवन का निर्माण हुआ था। बनने के कुछ समय बाद ही दीवारें और लिंटर दरकने लगा। इसके बाद यहां शिक्षण कार्य बंद कर दिया गया, तब से विद्यालय बंद पड़ा है। बरखंड़ी स्थित परिषदीय विद्यालय की छत की कड़ियां कई साल से टूटी पड़ी हैं। हालांकि इनमें भी शिक्षण कार्य बंद हैं। जिले में कुल 596 परिषदीय स्कूलों में 69 के भवन जर्जर हैं। इन्हें जर्जर घोषित कर नए भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली। जिला समन्वयक निर्माण सुधीर कुमार कहना है कि भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
11 साल में जर्जर हो गया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भवन
चौसाना में दथेड़ा के राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की इमारत जर्जर है। वर्तमान में 10वीं कक्षा में करीब 33 छात्राएं पंजीकृत हैं। स्कूल भवन का निर्माण 2009 में हुआ था। मात्र 11 वर्षों के अंदर भवन गिरने की स्थिति में आ गए हैं। प्रधानाध्यापिका सरिता देवी का कहना है कि दो भवन जर्जर हालात में हैं। उधर, डीआईओएस सरदार सिंह ने बताया कि स्कूल भवन का निर्माण 2009 में हुआ था। भवन के जर्जर होने के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
बारिश में टपकते हैं स्कूल के कमरे
ऊन में कस्बे के प्राथमिक विद्यालय-2 का भवन जर्जर हालत है। भवन का निर्माण 1962 में हुआ था। बरसात में भवन के अंदर पानी भर जाता है। भवन के खिड़की दरवाजे-टूटे पड़े हैं और छत कड़ियों की है, जो कि टपकती रहती है। विद्यालय में 77 बच्चे पंजीकृत हैं। मुख्य अध्यापक पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि पूर्व में कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है। उधर, ऊन ब्लॉक परिसर में भी भवनों की हालत खस्ता है। स्वास्थ्य विभाग के भवन जर्जर हालत में हैं। कर्मचारियों के आवास भी जर्जर हैं। ऊन साधन किसान सहकारी समिति का भवन भी जर्जर हो चुका है।
134 साल पुराने भवन में बैठते हैं कर्मचारी
कैराना में पुरानी तहसील अंग्रेजों के समय में 1886 में बनी थी। 20 साल पहले तक तहसील भवन में सभी सरकारी कार्यालय थे, लेकिन नया भवन बनने के बाद एसडीएम व तहसीलदार कोर्ट, आपूर्ति विभाग, राजस्व विभाग, सब रजिस्ट्रार कार्यालय नए भवन में चले गए। पुराना तहसील भवन पूरी तरह जर्जर हालत में है, लेकिन सर्वे विभाग के अधिकारी और लेखपाल इसी 134 साल पुराने भवन में बैठकर काम करते हैं।