सहारनपुर में कर्मचारी के शव को नगर निगम परिसर में रखकर सफाईकर्मियों ने साढ़े चार घंटे तक धरना और प्रदर्शन किया। एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर, अपर नगरायुक्त के द्वारा मांग मानने के लिए लिखित में देने के बाद ही सफाईकर्मियों ने धरना समाप्त किया। इसके बाद वह शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए।
सफाई कर्मी बीर सिंह 23 जुलाई को कांवड़ ड्यूटी के दौरान करंट लगने से झुलस गया था। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उसने मंगलवार की सुबह दम तोड़ दिया। बीर सिंह के आश्रितों को अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद दिलाने, बीमा राशि देने, परिवार के सदस्य को नौकरी देने सहित कई मांगों को लेकर सफाईकर्मी संगठनों के प्रतिनिधि मंगलवार को नगरायुक्त से मिले थे। मिलने के बाद सफाईकर्मियों ने आरोप लगाया था कि नगरायुक्त गजल भारद्वाज ने उनकी बात ठीक से नहीं सुनी और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
2 of 6
प्रदर्शन करते सफाईकर्मी
- फोटो : amar ujala
इससे नाराज सफाईकर्मी संगठनों ने बुधवार को कार्य बहिष्कार कर धरना और प्रदर्शन का एलान किया था। सफाईकर्मी बुधवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे बीर सिंह के शव को लेकर नगर निगम पहुंच गए। यहां लाउडस्पीकर लगाकर धरना शुरू कर दिया गया। इससे पहले निगम के सभी विभागों की तालाबंदी करा दी गई।
3 of 6
saharanpur news
- फोटो : अमर उजाला
उधर, धरने का पता चलने के बाद नगर आयुक्त निगम नहीं पहुंचीं। कर्मचारियों ने नगरायुक्त के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। करीब 11:30 बजे अपर नगरायुक्त राजेश यादव ने कर्मचारियों के बीच पहुंचकर उनको समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़े रहे। जिसकी वजह से उन्हें लौटना पड़ा।
4 of 6
प्रदर्शन करते सफाईकर्मी
- फोटो : amar ujala
वहीं कुछ देर बाद एसपी सिटी राजेश कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी, एसडीएम सदर किंशुक श्रीवास्तव, सीओ सिटी अजेंद्र सहित कई थानों की पुलिस नगर निगम पहुंच गई। दोपहर करीब पौने एक बजे अधिकारियों की कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक के बाद कर्मचारियों की मांगें मान ली गईं, जिसको कर्मचारियों ने लिखित में लिया। जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया और कर्मचारी शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर निकल गए।
5 of 6
शव रखकर प्रदर्शन करते कर्मी।
- फोटो : amar ujala
तीसरी बार में सफल रही बैठक
तीन बार अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बैठक हुई। सोनी आजाद सहित वरिष्ठ कर्मचारी नेता बैठक में शामिल हुए, लेकिन करीब 20 मिनट चली बैठक बेनतीजा रही, जिसकी वजह से बात नहीं बनी। इसके बाद एक बार फिर कर्मचारी नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया गया। इस बार लिखित में मांग मान ली गई, लेकिन पत्र को जैसे ही धरनारत कर्मचारियों के बीच जाकर पढ़ा गया तो वहां कई कर्मचारियों ने मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद तीसरी बार बैठक हुई, जिसमें एक और मांग को मान लिया गया।