मुजफ्फरनगर में कंपोजिट विद्यालय बीबीपुर के मिड-डे मील में छिपकली गिरने का शोर मचते ही बच्चों के बीच चीख-पुकार मच गई। बच्चे घबरा गए। जानकारी घर तक पहुंची तो अभिभावक जुटने शुरू हो गए। इस दौरान शिक्षक छिपकली गिरने से इनकार करते रहे। बीएसए शुभम शुक्ला जांच के लिए पहुंचे तो तहरी स्कूल में नहीं मिली। सवाल यह है कि जांच से पहले ही तहरी कहां चली गई।
Mid-Day Meal: बच्चों की चीख-पुकार सुन गांव में मचा हाहाकार, हालत देख अभिभावक भी कांप गए, देखिए तस्वीरें
अभिभावक राकेश कुमार का कहना है कि बच्चों की शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय शिक्षकों ने मामले को दबाने का प्रयास किया, जिससे बच्चों की जान पर बन आई थी। तहरी में छिपकली गिरने की गूंज हुई तो जांच के लिए अधिकारी पहुंचने शुरू हो गए। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल भी बीबीपुर पहुंचे। इसी दौरान बीएसए शुभम शुक्ला भी स्कूल पहुंचे और बच्चों से बातचीत की। तहरी की तलाश कराई गई, लेकिन तहरी नहीं मिली। सवाल यह है कि स्कूल से बची हुई तहरी कैसे गायब हो गई। तहरी नहीं मिलने के कारण सैंपलिंग भी नहीं हो सकी।
एंबुलेंस नहीं पहुंची, जिला पंचायत सदस्य लेकर पहुंचे अस्पताल
ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने एंबुलेंस को कॉल की थी, लेकिन एंबुलेंस से कोई रेस्पांस नहीं मिला। इसी दौरान किसी ने वार्ड सात के जिला पंचायत सदस्य तरुण पाल को कॉल की। वह अपनी गाड़ी लेकर पहुंचे और आठ बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
वहीं अधिकारियों तक मामला पहुंचा तो एंबुलेंस भी गांव पहुंची। जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती किए गए बच्चों ने दावा किया है कि उन्होंने तहरी में छिपकली देखी थी, जिसके बाद शिकायत की गई है। कक्षा तीन के छात्र ने कहा कि उसने छिपकली देखी है, उस पर कीडे़ चल रहे थे। कुछ बच्चों ने धोखे से खा भी लिया, जिस कारण उनके पेट में दर्द हो गया।
स्कूल की अव्यवस्थाओं से नाराज हैं ग्रामीण
बीबीपुर की महिला रेणू ने बताया कि उसकी बेटी स्कूल में पढ़ती है। महिला का कहना है कि पिछले चार महीने से स्कूल में पंखा तक नहीं लगा। बच्चे धूप में बैठकर पढ़ते हैं। बार-बार शिकायत की जाती है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। स्कूल में जो बच्चे पढ़ने जाते हैं, उन्हें सुविधा दी जानी चाहिए। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। बीबीपुर के प्रधान राजेश कुमार का कहना है कि तीन दिन पहले मिड-डे मील में कीड़े निकले थे। लगातार भोजन में शिकायतें आ रही हैं, लेकिन स्कूल का स्टाफ ध्यान नहीं दे रहा है। बच्चों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया गया है।