शुकतीर्थ की धार्मिक यात्रा में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य वीतराग स्वामी कल्याण देव की श्रद्धा और भक्ति में लीन हो गए। शुकदेव आश्रम के संग्रहालय में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने जैसे ही उन्हें अपने गुरु की फटी हुई जैकेट दिखाई, मौर्य ने उसे हाथों में लेकर माथे पर लगाए रखा। शिक्षा ऋषि की सादगी की बातें सुनकर वह भावुक हो गए।
PHOTOS: आखिर क्यों भावुक हुए केशव प्रसाद मौर्य, तस्वीरों में देखिए डिप्टी सीएम का शुकतीर्थ दौरा
इसके बाद मौर्य ने चरण स्पर्श कर स्वामी ओमानंद का आशीर्वाद लिया और श्री शुकदेव संस्कृत विद्यालय और आश्रम के मध्य बनाए गए व्यास सेतु एवं परीक्षित द्वार का लोकार्पण किया। वेद मंत्रोच्चार के बीच संत विभूति के समाधि मंदिर में पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने शिक्षा ऋषि की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। स्मृति यज्ञ में पूर्णाहुति के बाद उपमुख्यमंत्री ने महामुनि श्री शुकदेव के साक्षी अक्षय वटवृक्ष की परिक्रमा की। कथा व्यास सुमन कृष्ण शास्त्री के मंत्रपाठ के बीच उन्होंने श्री शुकदेव मंदिर में पूजा अर्चना की। विनम्रता से मौर्य ने पुरोहितों, आचार्यों और विद्वानों को नमन किया। डोंगरे जी भागवत भवन में पहुंचने पर उन्होंने शुकतीर्थ के संत और महात्माओं को प्रणाम कर स्वामी कल्याण देव के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। समारोह के मंच पर स्वामी ओमानंद ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप, शॉल, शुकतीर्थ साहित्य और प्रसाद भेंट किया। ट्रस्ट अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश और उपाध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी मुन्नी लाल रंगा ने मौर्य का आश्रम में पधारने पर अभिनंदन किया।
राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी भाजपा की ओर से उन्हें माला पहनाई। स्वामी ओमानंद के संबोधन के दौरान कई प्रसंगों को लेकर उपमुख्यमंत्री ने बार-बार हाथ जोड़कर संतों के आगे शीश झुकाया। सभा के उपरांत जैसे ही मौर्य वीतराग संत की स्मृतियों के संग्रहालय में पहुंचे, वहां शिक्षा ऋषि के वस्त्र, भोजन के पात्र और खड़ाऊ देखकर नतमस्तक हो गए। स्वामी ओमानंद ने अपने गुरु की फटी हुई जैकेट दिखाई तो डिप्टी सीएम ने उसे माथे से लगा लिया। मौर्य ने शुकतीर्थ त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में ट्रस्ट महासचिव केके विज, पूर्व न्यायाधीश बीबी सिंह, सुधीश प्रकाश, दिनेश गर्ग, कपिल गुप्ता मौजूद रहे।
परोपकार और करुणा मानव जीवन का भूषण : ओमानंद
स्वामी ओमानंद ने कहा कि जिस व्यक्ति के अंदर करुणा और परोपकार का भाव है, उसका जीवन सफल है। गुरुदेव ने स्वामी विवेकानंद और महात्मा बुद्ध के विचारों को जीवन में आत्मसात किया और गांव-गांव शिक्षा की अलख जगाई। शुकतीर्थ भगीरथी गंगा और भागवत ज्ञान गंगा का संगम है। यह भागवत की जन्मभूमि है। महान संत ने शुकतीर्थ के अलावा हस्तिनापुर, कुरुक्षेत्र और वैष्णो देवी तीर्थ को जनसुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाई। परोपकार जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। दूसरों के दुखों को दूर करने वाला ही असली परोपकारी है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भगीरथ की तरह शुकतीर्थ में गंगा की जलधारा लाएं।
वीतराग संत ने बनाया अलौकिक तीर्थ : अग्रवाल
कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि वीतराग स्वामी कल्याण देव के तप से भागवत भूमि देश का अलौकिक तीर्थ बन गया है। शिक्षा, चिकित्सा और अन्य धर्मार्थ क्षेत्र में सैकड़ों संस्थाएं स्थापित कर उन्होंने समाजोत्थान में ध्रुव स्थान हासिल किया। वर्तमान में धार्मिक नगरी में सबसे बड़ी जरूरत गंगा के निरंतर प्रवाह की है। यहां प्रतिवर्ष चार मेले भी लगते हैं। लाखों श्रद्धालु हर साल तीर्थ में आते हैं, जल के बिना उन्हें निराशा होती है। उप मुख्यमंत्री गंगा की धारा लाने की पुरानी मांग को पूरा करें।