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मां की चिता को मुखाग्नि देने के बाद इकलौता बेटा भी चल बसा, श्मशान में हुईं खून की उल्टियां
Fri, 08 Nov 2019 08:50 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 08 Nov 2019 08:50 AM IST
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मां-बेटे की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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इकलौता अधेड़ बेटा अपनी बुजुर्ग मां की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाया। श्मशान घाट में मां की चिता को मुखाग्नि देने के बाद बेटे को खून की उलटी आई और मौके पर उसने भी दम तोड़ दिया। मुरादाबाद के बिलारी के कोतवाली क्षेत्र में अमरपुरकाशी रतनपुर रोड पर स्थित खाता गांव निवासी रामकली (90 वर्ष ) की बुधवार की रात मौत हो गई। रामकली बीते कुछ दिनों से बुखार और श्वास रोग से पीड़ित थी।
मां-बेटे की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बृहस्पतिवार की सुबह खाता गांव के शमशान में उसका अंतिम संस्कार किया गया। रामकली के बेटे विजेंद्र सिंह (55 वर्ष) ने मुखाग्नि दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही रामकली की चिता जली तभी अचानक विजेंद्र सिंह को श्मशान में ही खून की उल्टियां होने लगीं। वह बेहोश से हो गए। मौके पर मौजूद रिश्तेदारों ने विजेंद्र को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने को फोन करके 108 सेवा की एंबुलेंस को बुला लिया।
श्मशान घाट में जलती मां-बेटे की चिताएं
- फोटो : अमर उजाला
श्मशान पर पहुंचने पर एंबुलेंस कर्मियों ने देखा कि विजेंद्र सिंह की मौत हो चुकी थी। मां की मौत के बाद जैसे ही विजेंद्र की मौत की जानकारी उनके घर पहुंची परिवार और रिश्तेदार महिलाओं में कोहराम मच गया। कुछ महिलाएं श्मशान घाट न जाने की परंपरा भी भुलाकर श्मशान पर ही पहुंच गईं।
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विजेंद्र सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विजेंद्र के शव को घर न लाकर वहीं चिता रचाने की तैयारियां शुरू कर दी गईं। लगभग दो घंटे बाद उसी श्मशान में दूसरी चिता रचाकर विजेंद्र सिंह का भी गमगीन माहौल में दाह संस्कार कर दिया गया।
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श्मशान घाट में जलती दोनों की चिताएं
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों ने बताया कि विजेंद्र सिंह को अपनी मां से बेहद लगाव था और वह उसकी खूब सेवा करते थे। बुढ़ापे में भी उसकी काफी सेवा करते थे। मां की मौत के गम का सदमा वह नहीं झेल पाए। मां और उसके इकलौते बेटे की अचानक मौत हो जाने पर खाता गांव में दिनभर शोक का माहौल रहा।