संभल के चंदौसी में रविवार को एसडीएम के पहुंचने पर बावड़ी से सटे मकान की दीवार टूटने के साथ ही मकान के नीचे दबे बावड़ी के प्रवेश द्वार की तलाश में खोदाई शुरू हो गई है। वहीं, बारिश के पानी से बचाव के लिए बावड़ी को शेड से कवर किया जाएगा। हालांकि वैकल्पिक तौर पर बावड़ी को तिरपाल से कवर किया गया है। बावड़ी में दो जनवरी को कुआं की खोदाई दौरान गैस निकलने के बाद एएसआई ने खोदाई पर रोक लगा दी थी। वहीं कई दिन से मलबा उठाने का कार्य भी बंद रहा था।
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मकान को तोड़ते हुए मजदूर
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बृहस्पतिवार को डीएम राजेंद्र पैंसिया ने मौका मुआयना कर ईओ को बावड़ी को टीन शेड से कवर करने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार को काम नहीं हुआ। बावड़ी के खुले स्थानों पर तिरपाल से ढक दिया गया था। जिससे डीएम ने नाराजगी जाहिर की। रविवार को सुबह आठ बजे ही पालिका की टीम मौके पर पहुंची और बावड़ी के ऊपर से मलबा उठाने का काम किया गया। साथ ही बावड़ी को बारिश के पानी से बचाव के लिए टीन शेड लगाने की कवायद शुरू की गई। बारिश का पानी बावड़ी में न भरे।
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बरसात से बचाने के लिए तिरपाल से ढकी बावड़ी
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वैकल्पिक तौर पर आसपास की दीवारों से तिरपाल बांध कर बावड़ी को ढका गया है। वहीं बावड़ी के ऊपर बने मकान की दीवार को परिवार के लोगों ने तोड़ा। दीवार टूटने के बाद दोपहर से मकान के नीचे बावड़ी के प्रवेश द्वार को तलाश के लिए खोदाई शुरू की गई। एसडीए निधि पटेल, पालिकाध्यक्ष लता वार्ष्णेय ने मौके पर पहुंच कर जानकारी की। ईओ कृष्ण कुमार सोनकर भी मौजूद रहे। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पीएसी तैनात रही।
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लक्ष्मणगंज में बावड़ी पर ईओ और पालिकाध्यक्ष से चर्चा करती एसडीएम
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मुन्नी माता मंदिर, पाप मोचन तीर्थ से हटाया अतिक्रमण
संभल पालिका की टीम ने शहर के तिवारी सराय स्थित मुन्नी माता मंदिर, पापमोचन तीर्थ और गजेंद्र बाबा जी समाधि से अतिक्रमण हटवा दिया। मंदिर के आसपास तमाम अवैध कब्जे कर लिए गए थे। जिस कारण काफी अव्यवस्था फैली हुई थी। शुक्रवार को डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया था।
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चंदाैसी में बावड़ी से मलबा निकालते श्रमिक
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इसी क्रम में कार्रवाई की गई है। डीएम ने बताया कि संभल में 68 तीर्थ और 19 कूप की मान्यता है। इसमें 24वें नंबर पर दर्ज पापमोचन तीर्थ शामिल है। इस परिसर में कुंड भी है। मंदिर के आसपास की जमीन पर एक समुदाय के कुछ लोगों के द्वारा अवैध कब्जे कर लिए गए थे। अवैध कब्जा कर बांस बल्ली और पत्थर का काम किया जा रहा था।