नौ साल का लंबा इंतजार करने के बाद गुरुवार को 24 दरोगा उत्तर पुलिस का हिस्सा बन गए। पीटीसी के डीआईजी शिव शंकर सिंह ने इन दरोगाओं को शपथ दिलाई। दरोगा सपना पूरा होने पर सभी उप निरीक्षक खुशी से झूम उठे।
उत्तर प्रदेश पुलिस का हिस्सा बने 24 दरोगा, नौ साल से संजोए बैठे थे वर्दी पहनने का सपना
पीटीसी के डीआईजी शिवशंकर सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 बैच के 24 उप निरीक्षकों को एक वर्ष पहले प्रशिक्षण दिया गया था। मुरादाबाद पीटीसी के लिए 25 प्रशिक्षु भेजे गए थे। ट्रेनिगं में 24 कैडेट्स ने ही भाग लिया। इस दौरान सभी प्रशिक्षु दरोगाओं को आउटडोर व इंडोर की ट्रेनिंग दी गई। एक साल की ट्रेनिंग में अपराध नियंत्रण, साइबर अपराध, दंगा नियंत्रण, शूटिंग, घुड़सवारी, बम निरोधक कार्रवाई, आईपीसी, सीआरपीसी और मानवाधिकार आयोग से जुड़ी जानकारी दी गई। व्यवहार और आधुनिक जैसे कई और बिंदुओं पर भी प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वार्षिक परीक्षा कराई गई थी। इसमें सभी 24 दरोगा सफल रहे। गुरुवार को वह वक्त आ गया जिसका इन कैडेट्स को करीब एक दशक से इंतजार था। पीटीसी के क्वार्टर गार्ड में डीआईजी पीटीसी शिव शंकर सिंह ने सभी नए दरोगाओं को शपथ दिलाई। सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आज से आपकी अग्निपरीक्षा शुरू होने जा रही है। कहीं भी तैनात रहें अपनी ड्यूटी को मेहनत और ईमानदारी से करें। ऐसा माहौल स्थापित करें कि पीड़ित बेझिझक थाने और चौकी आएं। अपराधी अपराध करने से पहले सौ बार सोचें।
बदायूं के गौरव कुमार सिंह चुने गए सर्वांग सर्वोत्तम
उपनिरीक्षक गौरव कुमार सिंह प्रशिक्षण के हर बिंदु पर सफल रहकर सर्वांग सर्वोच्च चुने गए हैं। वह बदायूं के बजीरगंज के मूल निवासी हैं। आउटडोर के लिए कैडेट आलोक कुमार व इनडोर प्रशिक्षण में योगेंद्र प्रसाद बेस्ट चुने गए। सर्वांग सर्वोत्तम गौरव कुमार सिंह ने बताया कि दरोगा बनने से पहले वह सिपाही रह चुके हैं। वह बरेली में एडीजी कार्यालय में तैनात रहे थे।
इंडोर में प्रथम स्थान हासिल करने वाले योगेंद्र प्रसाद मूलरूप से अयोध्या के रामपुर जौहन बीकापुर के निवासी हैं। वह 2015 में सिपाही के पद पर पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। आउटडोर में पहला स्थान पाने वाले आलोक कुमार सिंह भी पुलिस विभाग में सिपाही रह चुके हैं। आलोक जौनपुर निवासी हैं। सिपाही से दरोगा बनने पर तीनों उत्साहित नजर आए।
एक नंबर ने बदल दी 24 दरोगाओं की तकदीर
वर्ष 2011 में कुल 4010 अभ्यर्थियों का चयन दरोगा के पद पर हुआ था। एक प्रश्न का उत्तर गलत मान लिए जाने से 68 अभ्यर्थियों का चयन रुक गया था। ये सभी लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सभी का उत्तर सही माना और प्रदेश सरकार को इनकी ट्रेनिंग पूरी कराकर नियुक्ति देने के आदेश दिए। इनमें शामिल रहे 24 प्रशिक्षुओं ने गुरुवार को विधिवत दरोगा बन गए।