लाचारी... आंखें नम और लब खामोश। अपना दर्द कैसे बयां करें अल्फाज भी नहीं मिल रहे हैं। विंध्याचल के अखाड़ा घाट पर नाव हादसे के शिकार परिवार वालों का कुछ ऐसा ही हाल है। नाव हादसे के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को सत्यम (5) का शव मिला। लापता दो बच्चों समेत पांच लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
मिर्जापुर नाव हादसा: लाचारी... आंखें नम और लब खामोश, तीन परिवारों को ऐसा जख्म मिला जो शायद कभी न भर पाएगा
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दूसरे दिन भी घाट का माहौल द्रवित करने वाला रहा। सत्यम का शव मिलने के बाद विकास के साथ ही दीपक और राजेश के आंखों से अश्रु की धारा नहीं धमी। विकास की पत्नी गुड़िया, बेटा सत्यम (5) और शौर्य (ढाई वर्ष) गंगा में समाहित हो चुके हैं। विकास सिर्फ गंगा मैया से गुहार लगाता रहा कि मैय्या मेरे बबुआ को वापस कर दो। साथ में आए राजेश की पत्नी खुशबू और दीपक की पत्नी अनीषा और दो माह की बेटी (जिसका नामकरण नही हुआ था) भी काल के गाल में समा गईं। हादसे में बचीं अलका और रीतिका भी अपनी मां को रो-रो कर बुला रही थी कि मां आ जाओ ना।
झारखंड के रांची, जमशेदपुर और बक्सर से राजेश अपने जीजा विकास और अपने साले दीपक के परिवार साथ दर्शन करने के लिए विंध्याचल आए थे। परिवार के कुल 11 सदस्य कार से मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने पहुंचे। दर्शन पूजन करने से पहले सभी गंगा घाटपर स्नान करने के लिए गए। परिवार के सभी लोग अखाड़ा घाट पर सभी नाव पर सवार होकर गंगा पार गए।
स्नान करने के बाद सभी नाव से इस पर आ रहे थे कि बारिश के साथ तेज हवा चलने की वजह से बीच गंगा में नाव पलट गई। जिसमें नाविक समेत सभी 14 लोग गंगा नदी में गिर गए। गंगा किनारे मौजूद स्थानीय लोगों व गोताखोरों ने गंगा में कूदकर आठ लोगों को बाहर निकाला। छह लोग गहरे जल में समा गए। बृहस्पतिवार को पूरे दिन चले सर्च अभियान में एक बच्चे का शव मिला।