दिल्ली से देहरादून के बीच चार दशक तक मुजफ्फरनगर के खाईखेड़ी गांव के विनय त्यागी उर्फ टिंकू की दहशत रही। पढ़ाई के दौरान 1985 में मेरठ के सिविल लाइन थाने में अपहरण का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। आखिरी बार देहरादून में डॉ. प्रमोद त्यागी के घर खड़ी कार से जेवर, रुपये और कीमती सामान चोरी के मामले में नाम आया। पुरकाजी ब्लॉक से पत्नी निशी त्यागी को दो बार ब्लॉक प्रमुख बनाया और तीसरी बार चुनाव की तैयारी चल रही थी।
उत्तराखंड की सीमा पर बसे खाईखेड़ी के किसान परिवार में जन्मा विनय त्यागी का बचपन मेरठ में बीता। पिता सेवाराम मेडिकल कॉलेज में क्लर्क थे। छात्र जीवन से ही इकलौता बेटा अपराध की राह पर चल पड़ा। वर्ष 1985 से अब तक कई मुकदमे दर्ज हुए लेकिन कभी अदालत में आरोप साबित नहीं हुआ।
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गैंगस्टर विनय त्यागी का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'विनय ने सौ से ज्यादा अपराध किए'
वर्ष 1992 और 1993 में रुड़की में लूट, डकैती और जानलेवा हमले के मुकदमे दर्ज हुए। इसके बाद विनय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आखिरी मुकदमा दर्ज कराने वाले देहरादून में रह रहे हापुड़ के डॉ. प्रमोद त्यागी ने बयान में यह भी दावा किया कि विनय ने सौ से ज्यादा अपराध किए हैं।
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गैंगस्टर विनय त्यागी के अंतिम यात्रा के दौरान विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोप लगाया कि टिंकू हत्या कर लाश गायब कर देता है। उधर, अदालत में जमानत पर सुनवाई के दौरान टिंकू के अधिवक्ता ने कहा कि वह 12 मुकदमों में दोषमुक्त हो चुका है।
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एम्स ऋषिकेश की मोर्चरी के बाहर बैठे विनय त्यागी के परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पत्नी को तीसरी बार चुनाव लड़ाने की चल रही थी तैयारी
मुजफ्फरनगर। मेरठ में परिवार के साथ रह रहे विनय ने पहली बार 2006 में गांव का रुख किया। पत्नी को निशि त्यागी को पुरकाजी ब्लॉक की प्रमुख बनवाने में कामयाब रहा। सियासत में यह उसकी पहली कामयाबी थी।
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मुजफ्फरनगर के खाईखेड़ी में विनय त्यागी के घर लटका ताला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साल 2012 में सहारनपुर की देवबंद सीट से खुद विधानसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 2016 में फिर पत्नी को ब्लॉक प्रमुख बनाने में कामयाब रहा। 2026 में फिर से चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी चल रही थी।