आतंक का पर्याय बने सुपारी किलर रोहित की अभिरक्षा से फरारी ने ही उसकी मौत तय कर दी थी। मंगलवार को जनपद पुलिस ने रोहित को ढेर कर दरोगा दुर्ग विजय सिंह की शहादत का भी बदला ले लिया।
दरोगा दुर्गविजय सिंह की मौत के बाद से गुस्से में थी 'खाकी', परिजन बोले- सुकून मगर ताउम्र रहेगा जख्म
दो जुलाई को पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर जानसठ क्षेत्र के गांव सालारपुर स्थित ढाबे पर मिर्जापुर पुलिस पर हमला कर अभिरक्षा से हुई फरारी ने रोहित की मौत की इबारत लिखी, जिसके बाद नौ जुलाई को दिल्ली एम्स में दरोगा दुर्गविजय सिंह की मौत ने उसकी मौत पर मुहर लगा दी। दरोगा की मौत के बाद से खाकी गुस्से में थी, जिसका खामियाजा रोहित को मुठभेड़ में जान गंवाकर भुगतना पड़ा।
मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर क्षेत्र के जौहरा निवासी एक लाख के इनामी कुख्यात सुपर किलर रोहित के आठ साल पुराने आतंक का अंत करने में पुलिस को महज आठ घंटे का वक्त लगा।
पहले नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मंगलवार की सुबह पांच बजे मुजफ्फरनगर में रोहित और राकेश यादव को मार गिराया। फिर आठ घंटे बाद ही दोपहर करीब एक बजे मेरठ के दौराला में अमित और रजत उर्फ कालिया को मुठभेड़ में ढेर कर पुलिस ने रोहित गैंग का लगभग पूरी तरह सफाया कर दिया है।
मिल मंसूरपुर के जीएम भगत सिंह के साथ ही एक सराफ पर भी जानलेवा हमला गुर्गों के माध्यम से कराया था। वर्ष 2015 में सिखेड़ा के मोघपुर के पास कानूनगो प्रमोद शर्मा की हत्या कर लाइसेंसी पिस्टल लूट लिया था। इसी वर्ष उसने खतौली में भी एक युवक का मर्डर किया, तभी वह पुलिस के हत्थे चढ़ा था जेल में बंद था।
जेल में रहते हुए ही उसका मंसूरपुर क्षेत्र में अवैध वसूली का काला कारोबार शुरू हुआ था। रोहित ने अपना आतंक जारी रखते हुए अपने गुर्गों से 25 जनवरी 2017 को माफिया सरगना सुशील मूंछ के करीबी यशपाल राठी का मंसूरपुर हाईवे पर उसकी दुकान के सामने ही मर्डर कराया था। यहीं से रोहित का माफिया सरगना सुशील मूंछ के साथ छत्तीस का आंकड़ा शुरू हुआ था।
हालांकि जिस आपराधिक साम्राज्य को खड़ा करने में सुपारी किलर रोहित को आठ साल का समय लगा। एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि रोहित पर विभिन्न थानों पर हत्या, लूट, रंगदारी जैसे संगीन अपराधों के 44 मुकदमे दर्ज है, जबकि उसके साथ मारे गए राकेश यादव पर एक दर्जन मुकदमे दर्ज थे।