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मेरठ: मेडा सचिव पर गिरी गाज, सीलिंग के आदेश के बाद बेचैनी, उल्देपुर में बुलडोजर लेकर नहीं घुस पाई टीम

Thu, 24 Sep 2026 10:49 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 24 Sep 2026 10:49 AM IST
सार

मेरठ में 16,726 भवनों की सीलिंग के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेडा में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जानकारी शासन स्तर से ली जा रही है। सचिव अर्पित गुप्ता को हटाया गया है और जोन बी, सी व डी में सर्वे की तैयारी है।

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Meerut Illegal Construction Case: MDA Secretary Removed as Officials Face Scrutiny After Sealing Order
अवैध निर्माण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में सुप्रीम कोर्ट में अवैध निर्माण की सूची देने में लापरवाही पर मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव अर्पित गुप्ता पर गाज गिरी है। बुधवार को उन्हें प्राधिकरण से हटा दिया गया। उन्हें नई तैनाती नहीं दी गई है। फिलहाल वह प्रतीक्षारत हैं। वहीं अवैध निर्माण में प्राधिकरण के कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं, इसकी भी लखनऊ से जानकारी ली जा रही है। 

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सचिव पर कार्रवाई की जानकारी मिलते ही प्राधिकरण में दिनभर अलग-अलग चर्चाएं होती रहीं। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी नहीं मिला है। आदेश सर्वोपरि है। आदेश मिलते ही समीक्षा की जाएगी। इसके बाद रणनीति बनाकर जवाब प्रस्तुत किया जाएगा। 
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शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इस दौरान मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव ने शहर के जोन-ए की सूची सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की। इसमें बताया गया कि 16,726 हजार भवन मानचित्र के आधार पर नहीं बने हैं।  

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जोन-ए के 16,726 हजार भवन सूची में
सचिव अर्पित गुप्ता की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी भवनों को सील करने के आदेश कर दिए। इस दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ में ही थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी लगने पर मेरठ में खलबली मच गई। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में मौजूद सचिव ने अवैध निर्माण की सूची बताने में लापरवाही की।

उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्राधिकरण के स्थापित होने से पहले वाले निर्माण भी सूची में शामिल हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नाराजगी जताई। मंगलवार को सचिव अर्पित गुप्ता लखनऊ में थे। बुधवार को विशेष सचिव लखनऊ ने उन्हें मेरठ प्राधिकरण से हटा दिया। अर्पित गुप्ता को मई 2026 में ही मेरठ प्राधिकरण में सचिव की तैनाती मिली थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत सूची की माॅनिटरिंग करने वाले अधिकारियों की भी जानकारी शासन स्तर से ली जा रही है।

सीलिंग के आदेश के बाद बेचैनी
शहर के जोन-ए में 16,726 हजार भवनों को अवैध निर्माण के तौर पर चिह्नित किया गया है। इन भवनों की सीलिंग के आदेश के बाद से बेचैनी का माहौल है। अब जोन-बी, सी और डी में भी सर्वे की तैयारी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट से आदेश आने के बाद शहर के भवन स्वामियों में दहशत का माहौल है। इसको लेकर शहर में अलग-अलग चर्चाएं रहीं। किसका भवन अब ध्वस्तीकरण की जद में आएगा इसकी सूची अभी जारी नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

प्राधिकरण से पहले बने निर्माण पर सवाल
विकास प्राधिकरण की नियमावली के अनुसार वर्ष 1976 में प्राधिकरण की स्थापना के बाद वाले निर्माण ही उसके दायरे में आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि प्राधिकरण से पहले बने निर्माण पर कार्रवाई कैसे होगी। इस बारे में अभी प्राधिकरण के अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। प्राधिकरण ने जिन 16,726 हजार भवनों को चिह्नित किया है, उनमें से काफी भवन स्वामियों ने अपने आवासीय और व्यावसायिक भवन 50 साल पुराने बताए हैं।

पहले भी जोन-ए में अवैध काॅलोनी हुईं थीं चिह्नित
मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) की ओर से अवैध कॉलोनियां पहले भी चिह्नित की गई थी। इसमें जोन-ए की 43 कॉलोनियों की जानकारी दर्ज है।  कॉलोनी के स्थान, निर्माणकर्ता का नाम, क्षेत्रफल, पक्के भवनों की संख्या और प्राधिकरण की ओर से की गई कार्रवाई का ब्योरा दिया गया है। कई कॉलोनियों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की तारीख भी दर्ज है। 

पूर्व में जारी सूची के मुताबिक जोन-ए में नूर नगर, लिसाड़ी, बजौट, फतेहउल्लाहपुर, बिजली बंबा बाईपास, परतापुर और हापुड़ रोड समेत कई इलाकों की कॉलोनियां शामिल हैं। इनमें कुछ कॉलोनियों को ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि कुछ मामले न्यायालय और सुनवाई की प्रक्रिया में हैं। सूची में दर्ज संख्याओं के अनुसार 436 पक्के भवनों का स्पष्ट आंकड़ा दिया गया है। 

बताया गया कि यह सूची एमडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष अभिषेक पांडे के कार्यकाल में चिह्नित कॉलोनियों की है। इसके बाद करीब 130 और कॉलोनियां संज्ञान में आई हैं, जो इस सूची में शामिल नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार मेरठ में विकसित हो चुकी अवैध कॉलोनियों की संख्या 500 से अधिक बताई गई है।  

उल्देपुर में बुलडोजर लेकर नहीं घुस पाई टीम
अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करने के लिए मेडा ने बुधवार को बुलडोजर तैयार किए। उल्देपुर गांव में कार्रवाई के लिए टीम भी रवाना हुई। लेकिन लोगों के विरोध की जानकारी मिलने के बाद टीम गांव में नहीं घुस पाई। दोपहर से बुलडोजर गंगानगर में ही खड़े रहे। पुलिस फोर्स न मिलने के चलते कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी।

सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर और आसपास की अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उल्देपुर में चार कॉलोनियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई थी। बुधवार को दोबारा आदेश आने पर मेडा ने कार्रवाई की तैयारी की। बुलडोजर और टीम तैयार कर दोपहर में उल्देपुर के लिए रवाना हुई। रास्ते में टीम को विरोध की आशंका की सूचना मिली।  

पुलिस बल नहीं मिला, चार घंटे इंतजार
इसके बाद मेडा ने गंगानगर थाने की पुलिस से संपर्क किया। पुलिस बल न मिलने के कारण मेडा की टीम गंगानगर में चार घंटे इंतजार करती रही। इसके बाद टीम को वापस लौटना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस बल मिलने के बाद ही उल्देपुर में कार्रवाई होगी। बुलडोजर चलाकर अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया जाएगा।

व्यापारियों के लिए पुनर्वास नीति बनाने का निर्णय सराहनीय है। अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की जा सकती है तो जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्र में बैठक करनी चाहिए। - जितेंद्र गौतम, समाजसेवी

लीज पर दुकान मिलने से व्यापारियों को स्थायी व्यवस्था मिल सकेगी। रामायण कालीन पूरे शहर को बचाने के लिए जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए। -अनुपमा रस्तोगी, तिलक रोड निवासी।

650 व्यापारियों के पुनर्वास की योजना से लंबे समय से चल रही समस्या का समाधान हो सकेगा। पर पूरे शहर की समस्या के विषय में भी जनप्रतिनिधियों को जागरूक होना होगा। हर घर आपका है। - कुलदीप शर्मा, ब्रह्मपुरी निवासी

आचार संहिता का बहाना क्यों है। योजना की घोषणा के लिए पहले ही स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी। अब भी समय रहते लोगों के हित में आगे आए जनप्रतिनिधि। -सुदीप जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा।

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