उत्तर प्रदेश में मेरठ और बागपत जिले के दो गांवों में जहरीली शराब का कहर बरपा। इन जनपदों के दोनों गांवों में जहरीली शराब पीने से अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं दोनों गांवों में मातम पसरा हुआ है। यहां तक की गांवों में चूल्हे भी नहीं चले और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अगली स्लाइडों में देखिए तस्वीरें-
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गमजदा परिजन व ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
बागपत के चमरावल गांव में शुक्रवार को मुकेश त्यागी की अचानक हालत बिगड़ गई। इसके बाद उपचार के दौरान मुकेश की मौत हो गई। मुकेश की मौत ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते आईसीयू यूनिट शुरू नहीं हो सकी है। मरीज पहले पिलाना से बागपत लाया गया और फिर वापस जिला मुख्यालय से मेरठ रेफर किया गया। इलाज में इतनी देर हो गई कि उसकी जान नहीं बच सकी।
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विलाप करते परिजन
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उधर, मेरठ के मीरपुर जखेड़ा गांव में जहरीली शराब पीने से तीन लोगों की मौत के 36 घंटे बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की है। पुलिस घटना को फूड प्वॉइजनिंग का बताकर पल्ला झाड़ने में लगी है। यह हाल तब है, जब पीड़ित परिवार ने लिखित में अवैध शराब की शिकायत की है। ऐसे में सवाल यह है कि बिना एफआईआर किसकी और कैसी जांच होगी। यदि जांच शुरू भी होती है, तो समय बीतने के बाद इससे जुड़े सबूत भी खत्म हो जाएंगे। अंतत: पुलिस अपने मकसद में कामयाब हो जाएगी।
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जानकारी देते ग्रामीण
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मुकेश के पेट में हुआ था दर्द
चमरावल गांव पिलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नजदीक है। शुक्रवार सुबह मुकेश त्यागी की हालत खराब हुई। पेट में दर्द, शरीर में अकड़न और दिखाई नहीं देने की शिकायत हुई। परिजन पिलाना लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने गंभीर हालात के कारण जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। दर्द से तड़प रहे मुकेश का चेकअप किया गया, इसके बाद उसे जिला चिकित्सालय से मेरठ रेफर किया गया। पहले पिलाना से बागपत तक आने में समय खर्च हुआ और इसके बाद बागपत से मेरठ ले जाने में समय बर्बाद हो गया।
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विलाप करते परिजन
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स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि जिला चिकित्सालय में आईसीयू वार्ड संचालित नहीं है। इसकी वजह है स्टाफ की कमी है। सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाह का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के कारण यूनिट शुरू नहीं हो सकी है। इसके लिए पांच फिजीशियन समेत 19 लोगों के स्टाफ की जरूरत है।