मंजिल को पाना तो दूर उनके हालात ऐसे भी नहीं थे कि वो मंजिल की ओर एक भी कदम बढ़ा पाते। लेकिन उनमें जज्बा था कुछ कर गुजरने और अपनों के सपनों को साकार करने का। यहीं लगन, मेहनत और ईमानदारी आज उनको उस मुकाम पर ले आई, जहां हर कोई उनकी पीठ थपथपा रहा है। यूपी बोर्ड परीक्षा देने वाले शहर के कुछ ऐेसे भी मेधावी हैं, जिन्होंने विपरीत हालातों में लक्ष्य हासिल कर सभी छात्रों के लिए नजीर पेश की है।
Pics: रुके नहीं कदम... हालात ने खूब डराया, जज्बे से पा लिया मुकाम
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परीक्षा के समय पिता की मौत पर भी नहीं टूटी
कमेला रोड़ निवासी युशरा ने 10वीं में 84.89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। बोर्ड परीक्षा शुरू होने से कुछ दिनों पहले ही युशरा के पिता अजीज अहमद की मौत हो गई। इसके बावजूद युशरा ने हिम्मत नहीं हारी। उसने पढ़ाई पर फोकस किया और हौसले से परीक्षाएं दीं। रविवार को परीक्षा का परिणाम आया तो सभी चौंक गये। युशरा के भाई जावेद ने बताया छह भाई-बहनों में युशरा सबसे छोटी है। परिवार के लोगों ने अगर उसकी हिम्मत नहीं बढ़ाई होती तो वह परीक्षा भी नहीं दे पाती। घर के हालात भी ऐसे नहीं थे। युशरा ने बताया कि वह भविष्य में शिक्षिका बनना चाहती है।
चपरासी के बेटे का जिले में चौथा स्थान
एसडी सदर कालेज से इंटरमीडिएट परीक्षा में अमन भारती ने 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उनके पिता दिनेश कुमार एक प्राइवेट कालेज में चपरासी के पद पर तैनात हैं। आर्थिक तंगी और विपरीत हालातों के बीच भी अमन भारती ने पढ़ाई पर फोकस कर परिवार का नाम रोशन किया है। बागपत रोड संजय कालोनी निवासी अमन ने जिले में चौथा स्थान पाया है। अमन की सफलता से उसका परिवार गदगद है। अमन ने बताया कि पढ़ाई के दौरान दादा अमर सिंह ने बहुत सपोर्ट किया। उन्हीं की बदौलत वह अच्छे अंक ला पाया है।
पढ़ाई छोड़ बहन ने निभाया पिता का फर्ज
दिल्ली रोड स्थित शिवशक्तिनगर निवासी अमन मित्तल ने इंटरमीडिएट में 86.8 प्रतिशत अंक पाकर सफलता प्राप्त की। हाईस्कूल पास करने के बाद अमन के लिए इस मुकाम तक पहुंच पाना आसान नहीं था। वजह चाय का स्टॉल लगाने वाले उसके पिता की हाईस्कूल करने के दौरान किसी बीमारी से मौत हो गई। अमन की बड़ी बहन पायल ने उसकी पढ़ाई करने के जज्बे को कम नहीं होने दिया। पायल ने सीए की पढ़ाई छोड़कर अमन और छोटी बहन की पढ़ाई का बीड़ा उठाया। उसने ट्रांसपोर्टनगर में एकाउंटेंट की नौकरी की।
अपने बूते की पढ़ाई
फैज ए आम इंटर कालेज के छात्र मौ. मारूफ ने इंटरमीडिएट में 84 प्रतिशत अंक हासिल किये। मारूफ मजदूरी कर पढ़ाई का खर्च खुद उठाते हैं। इस्लामाबाद निवासी मारूफ को समय मिलता है तो गरीब बच्चों को ट्यूशन भी देते हैं। कैप्टन आईए खान ने बताया पढ़ाई में दिलचस्पी के चलते उसको किताबें भी दे चुके हैं।
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