पश्चिमी यूपी के जिलों में किसान आज केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के विरोध में काला दिवस मना रहे हैं। वहीं मेरठ में किसानों ने अपने घरों, ट्रैक्टरों पर काले झंडे लगाकर विरोध जताया है। परतापुर के घोपला गांव में केंद्र सरकार का पुतला दहन किया गया। इस मामले की सूचना मिलने पर परतापुर पुलिस गांव में पहुंची तो भाकियू कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उधर, मेरठ के छुर गांव में भी किसानों ने सरकार के विरोध में अपने घरों व वाहनों पर काले झंडे लगाकर कृषि कानूनों का विरोध किया। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के जिला महासचिव मेरठ विनेश प्रधान, श्यामवीर तलियान, रंजीत सिंह, धर्मबीर, अनिल, कल्लू, रामपाल ओमबीर, अमित, जगबीर, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
वहीं राष्ट्रीय लोकदल पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी इस लड़ाई को आगे लड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष मतलूब गोड़, प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान, राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष किसान प्रकोष्ट राम मैहर गुर्जर, पूर्व जिलाध्यक्ष राहुलदेव, प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा, क्षेत्रीय अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जाति नरेन्द्र सिंह खजूरी, क्षेत्रीय सचिव सोहराब ग्यास, जिला प्रवक्ता कमलजीत सिंह गुर्जर, वीरेन्द्र तोमर, सत्य चंद, सतेंद्र तोमर आदि मौजूद रहे।
भाकियू ने मनाया काला दिवस
किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार को काला दिवस मनाया। शामली में किसानों ने अपने घरों और वाहनों पर काले झंडे लगाकर विरोध जताया है। उधर, चौसाना क्षेत्र में किसानों ने बाइक रैली निकाली। भाकियू नेताओं ने सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इस दौरान किसानों ने हाथों में काले झंडे लेकर कई गांवों में रैली निकाली।
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किसानों को समझाती पुलिस।
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बागपत में आज काला दिवस मनाने के लिए भाकियू कार्यकर्ता राष्ट्र वंदना चौक पर एकत्र हुए। इस दौरान उन्होंने चौराहे पर जगह-जगह काले झंडे लगाए। इसके बाद भाकियू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। सतर्कता बरतते हुए प्रशासन ने पहले से ही पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए हैं।
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विरोध करते किसान।
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कृषि कानून कानूनों के विरोध में छह माह से आंदोलनरत किसानों की मांग पूरी न होने पर किसानों ने जिले भर में प्रदर्शन किए। दिल्ली-सहारनुपर हाईवे पर भाकियू नेताओं ने ट्रैफिक रोककर प्रदर्शन किया। वहीं काले झंडे लहराते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में एसडीएम अनुभव सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए कृषि कानून वापस लेने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग की। हिम्मत सिंह, अश्वनी, नरेश, तनवीर अहमद, राजवीर सिंह गुर्जर, ओमकार सिंह, महेश, प्रदीप गुर्जर आदि मौजूद रहे।
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काले झंडे लगाते किसान।
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इसके अलावा बड़ौत में भाकियू नेताओं ने हाथों में काले झंडे लेकर दिल्ली बस स्टैंड पर जोरदार प्रदर्शन किया। चांदीनगर क्षेत्र में ढ़िकौली, औगटी, पांची, नंगलाबडी गावों में पंचायत कर केंद्र सरकार के खिलाफ झंडे लहराए। सयुक्त मोर्चा किसान के आह्वान पर ढ़िकौली गांव के बनिया वाली जगह पर एक बैठक का आयोजन किया। इस दौरान एडवोकेट सोमेंद्र ढाका ने कहा कि पिछले छह माह से किसान कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। विरोध प्रदर्शन करने वालों में संदीप प्रधान, रामबीर ढाका, विनय ढाका, नीरज,वीरपाल, जयदेव, ओमप्रकाश, डॉ. जितेंद्र आदि किसान मौजूद रहे। इसके अलावा भी कई गांवों में काला दिवस मनाते हुए किसानों ने प्रदर्शन किए।
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मुजफ्फरनगर में कृषि कानूनों का विरोध करते किसान।
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मुजफ्फरनगर में तीनों कृषि कानूनों के विरोध व दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर किसान आज काला दिवस मना रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन ने किसानों से अपने घरों पर काले झंडे लगाने, विरोध प्रदर्शन करने और केंद्र सरकार का पुतला फूंकने का आह्वान किया है। भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर जनपद में कई स्थानों पर किसानों ने काले झंडे लेकर विरोध प्रदर्शन किया। शाहपुर, मंसूरपुर, पुरकाजी में विरोध प्रकट किया गया।