कहावत है वक्त के साथ जो नहीं चलता वो पीछे छूट जाता है, जो वक्त के साथ चलते हैं, बुलंदियों को छूते हैं। जिन किसानों ने खुद को वक्त के साथ बदल लिया वह आजकल कृषि में भी नए-नए प्रयोग करके पैसे के साथ नाम भी कमा रहे हैं। भामौरी के किसान सुनील फौजी के गुुड़ की मिठास आस्ट्रेलिया से लेकर यूएसए तक पहुंच गई है तो नरहेड़ा के किसान फिरे सिंह की 10 किलो वजन वाली जैविक खेती द्वारा उगाई गोभी बड़े-बड़े होटलों की रसोई में जगह बना रही है। चौधरी चरण सिंह की जयंती पर आयोजित किसान प्रदर्शनी में इन किसानों के स्टॉल पर जो भी पहुंचा वो प्रशंसा किए बिना नहीं रहा।
वाह! मिठाई जैसे स्वाद वाला गुड़...
सरधना के भामौरी गांव के रहने वाले सुनील कुमार फौजी ने 2018 में सेना से वीआरएस लेकर खेती करने की ठान ली। 50 बीघा खेती में गन्ने की खेती करते हुए कोल्हू पर प्राकृतिक विधि से गुड़ बनवाना शुरू किया। दो साल बाद उन्होंने 10 लाख रुपये की लागत से खुद का गुड़ प्लांट लगा लिया। मिठाई की शक्ल में उनका गुड़ और शक्कर अब एनआरआई के माध्यम से यूएसए, आस्ट्रेलिया और स्विटरजलैंड जैसे देशों में पहुंच रहा है।
सुनील ने लोगों की पसंद को देखते हुए लौकी, गाजर, आंवला, और मेवे के फ्लेवर वाला गुड़ तैयार किया। इन चारों फ्लेवर वाले गुड़ की सबसे ज्यादा डिमांड है। सुनील अब गुड़ के साथ सिरका और अचार भी तैयार कर रहे हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने कई किसानों का समूह बना लिया है, वे सभी पुरानी प्रजाति का गन्ना उगाते हैं, जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। उनके गुड़ के स्टॉल पर जो भी अधिकारी-किसान पहुंचे वह गुड़ मुंह में रखते ही बोल पड़...वाह ये तो मिठाई जैसा गुड़ है।
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ड्रेगन फ्रूट
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10 किलो की गोभी आकर्षण का केंद्र
किसान प्रदर्शनी में नरहेड़ा के किसान फिरे सिंह की 10 किलो की गोभी सभी के आकर्षण का केंद्र रही। फिरे ने बताया कि वे पिछले 10 साल से गोभी की खेती करते हैं। गोबर की खाद के अलावा वह कुछ उपयोग नहीं करते हैं। लहसुन, प्याज, धतूरा, नीम के पत्ते आदि मिलाकर खुद आर्गेनिक कीटनाशक तैयार करते हैं। सात बीघा जमीन में सवा तीन महीने में गोभी उगाकर वह औसतन दो लाख रुपये का मुनाफा ले लेते हैं। गोबर की खाद से जो फसल तैयार होती है, वह अच्छी होने के साथ सेहत के लिए भी लाभदायक है।
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ट्रैक्टर
- फोटो : अमर उजाला
सिरका और शहद भी बना पहचान
झिटकरी गांव के नरेश सिरोही अपनी जमीन में सिर्फ गन्ने की खेती करते हैं। इससे वे सिरका बनाते हैं। इसके अलावा वे जामुन, सेब, लीची, आंवला, खजूर और अंगूर आदि फलों का भी सिरका बनाते हैं। आठ साल से वह मार्केट में अपना ब्रांड बनाकर सिरका बेच रहे हैं। उनका मुनाफा आठ गुना बढ़ गया है। मऊखास के किसान चंद्रशेखर मधुमक्खी पालन करते हैं। अपनी खेती के अलावा वे दूसरे किसानों के समूह बनाकर भी इस काम को कर रहे हैं। वे भी अपना शहद ब्रांड बनाकर बेच रहे हैं।