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अमर उजाला लाइव: कागजों में टॉप पर, लेकिन हकीकत कुछ और, तस्वीरों में देखें शौचालयों का हाल

Fri, 13 Mar 2020 12:31 PM IST
कपिल kapil दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 13 Mar 2020 12:31 PM IST
सार

कागजों पर मेरठ में शौचालयों की स्थिति अन्य जिलों की तुलना में टॉप पर है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। शौचालयों का हाल तस्वीरों में देखिए।

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Swachh Bharat Mission, Toilets have closed in many village of Meerut city
शौचालयों पर लटके पड़े ताले - फोटो : अमर उजाला

कागजों पर मेरठ में शौचालयों की स्थिति अन्य जिलों की तुलना में टॉप पर है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। गांवों में शौचालयों के हालात बदतर है। कहीं उन्हें स्टोर रूम की तरह प्रयोग किया जा रहा है तो कहीं उनमें ताले लटके हैं। कई जगह तो झाड़ियां तक उगी नजर आईं। हाल ही में जिले में तैनात किए गए लोकपाल के पास शौचालयों में अनियमितता की लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं। वहीं अधिकारी पहले ही जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित कर चुके हैं।

Swachh Bharat Mission, Toilets have closed in many village of Meerut city
बंद पड़े शौचालय - फोटो : अमर उजाला

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले के रजपुरा ब्लॉक के मऊखास और खेड़की गांव में बनाए गए शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। यहां सभी शौचालयों में ताले लटकने के साथ सामान रखने की व्यवस्था कर ली गई है। जिला प्रशासन की नजर इन गांवों पर नहीं है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने शौचालयों की स्थिति पर लखनऊ में सभी जिलों के सीडीओ, जिला पंचायती राज अधिकारी की बैठक बुलाई थी। यहां मेरठ की स्थिति टॉप पर रही थी, जबकि गांवों में शौचालय जर्जर पड़े हैं। उनका उपयोग भी नहीं किया जा रहा है।

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शौचालयों की हालत खस्ता - फोटो : अमर उजाला

ग्रामीणों को नहीं किया जागरूक 
स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। गंगा किनारे स्थित गांवों में भी शौचालयों पर विशेष ध्यान है। इसके बाद भी जिला प्रशासन कोई जागरूकता अभियान नहीं चला रहा है। ग्रामीणों को शौचालय उपयोग करने से होने वाले लाभ से परिचित नहीं कराया जा रहा है।

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बंद पड़े शौचालय - फोटो : अमर उजाला

दोबारा बना दिए शौचालय 
गांव में जिनके घर में पहले से शौचालय थे, उनके घर भी जिला प्रशासन ने शौचालय बनवा दिए। लोकपाल के पास पहुंची शिकायतों में ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों ने शौचालय में ताले लटकाने वालों की सूची भी लोकपाल को सौंपी है। इन मामलों में ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान पर शौचालय में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। शौचालयों को वर्ष-2016-17 में बनाया गया था। इसके बाद इनके संचालन पर जिला प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद जिले को खुले में शौच मुक्त कर दिया।

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खस्ता हालत में शौचालय - फोटो : अमर उजाला

जांच कराई जाएगी
मुख्य विकास अधिकारी ईशा दुहन ने बताया कि मेरे संज्ञान में ऐसी कोई शिकायतें नहीं हैं। अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।  

रिकवरी की जाएगी
लोकपाल अंशु त्यागी ने बताया कि शौचालयों की शिकायतें पहुंच रही हैं। ग्राम प्रधान और सचिव को तलब किया जाएगा। सभी शिकायतों पर जांच करने के बाद रिकवरी की जाएगी।

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