मेरठ के बहादरपुर गांव की चकरोड से निकलकर अन्नू रानी अब टोक्यो ओलंपिक के लिए रवाना होंगी। 12 साल के खेल कॅरियर में आर्थिक समस्याओं को दरकिनार कर अन्नू ने लाजवाब प्रदर्शन किया। हाल ही में 63.24 मीटर भाला फेंककर नेशनल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जहां वह मात्र .77 मीटर से ओलंपिक क्वालिफाई करने से चूक गई थीं। लेकिन वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर ओलंपिक में शामिल होने का गौरव हासिल हुआ।
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कद छोटा, लेकिन हौसला सबसे बड़ा
अन्नू रानी का कद करीब साढ़े पांच फीट है। जबकि विदेशी महिला खिलाड़ियों का कद छह फीट से भी ऊपर है।
अन्नू रानी ने बताया कि भाला फेंक में दुनिया की सबसे छोटे कद की खिलाड़ी हैं। इसके बावजूद वर्ल्ड चैंपियनशिप में चेक रिपब्लिक की ओलंपियन खिलाड़ी बाराबोरा को हराया। जिसका कद छह फिट दो इंच था। इसके अलावा अन्य देशों की भाला फेंक खिलाड़ियों का कद छह फिट या उससे ऊपर है।
खेल बदला तो बदल गई जिंदगी
गुरुकुल प्रभात आश्रम के स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने उन्हें 2010 में डिस्कस व गोला फेंक के बजाए भाला फेंक पर फोकस करने की सलाह दी। खेल बदलते ही अन्नू रानी की जिंदगी बदल गई। अभी तक वह भाला फेंक में एक से बड़ी एक कामयाबी हासिल कर चुकी हैं।
अन्नू रानी की खास उपलब्धियां
- 2014 एशियाई गेम्स में कांस्य
- 2015 में एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य
- 2017 में एशियाई चैंपियनशिप में रजत
- 2014 कामनवेल्थ गेम्स में प्रतिभाग
- वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फाइनल में जगह पक्की करने वाली पहली भारतीय बनीं
- आठ बार की राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर एथलीट