हंसते-खेलते परिवार में सबकुछ ठीक चल रहा था, अचानक न जाने किसकी नजर लगी कि पल भर में खुशियां मातम में बदल गईं। मेरठ में रेलवे रोड आनंदपुरी निवासी राजेश कुमार के घर से जब जवान बेटे व बहू की अर्थियां उठीं तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। घर का हर सदस्य बदहवास था जो यह विश्वास नहीं कर पा रहा था कि अब उनके बीच प्रदीप और सारिका नहीं रहे हैं।
उजड़ गया हंसता खेलता परिवार: मातम में बदली खुशियां, नवदंपती की मौत से सदमे में परिजन, देखें तस्वीरें
होनी है, जिसे कोई नहीं टाल सकता
पिता राजेश व माता रजनी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बताते हैं कि अलीगढ़ में शादी समारोह में उनके परिवार ने जमकर खुशी मनाई। नई नवेली दुल्हन के साथ उनके बेटे को हर किसी का प्यार मिला। समारोह खत्म कर जब लौटने की तैयारी शुरू हुई तो उन्होंने प्रदीप और बहू सारिका से कहा कि तुम दोनों बस से चले जाओ। वह बाइक पर अक्षय के साथ आ जाएंगे लेकिन, होनी को कौन टाल सकता है, प्रदीप नहीं माना।
मुझे क्या पता था कि मेरे बच्चे तड़प रहे
राजेश उस पल को सोचकर सहम जाते हैं, जब उनके बच्चों का एक्सीडेंट हुआ और वह नजरअंदाज कर सामने से निकल गए। दरअसल, प्रदीप-सारिका बाइक से मेरठ के लिए रवाना हुए तो पूरा परिवार थ्री व्हीलर से अलीगढ़ बस अड्डे के लिए चल दिया। खैर-अलीगढ़ संपर्क मार्ग पर लोगों की भीड़ देख बोले किसी के साथ हादसा हुआ है। लेकिन यह जरा भी एहसास नहीं था कि सड़क पर लहूलुहान दोनों बच्चे उन्हीं के हैं।
हर सपना पूरा करना चाहता था प्रदीप
बेहद शांत स्वभाव का प्रदीप सुनार की दुकान पर काम करता था। महीना होते ही सैलरी पिता के हाथ पर लाकर रख देता था। बीकॉम के बाद वह चार्टर्ड अकाउंटेंट की तैयारी कर रहा था। प्रदीप अच्छा चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर अपने परिवार का न केवल नाम रोशन करना चाहता था, वह परिवार के हर सपने को पूरा करना चाहता था। वहीं छोटे भाई-बहन अपने बड़े भाई और भाभी को खोने का दुख बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। आस-पास के लोगों ने भी दुख जताया है।
सूरजकुंड पर हुआ अंतिम संस्कार
रविवार देर रात परिवार प्रदीप और सारिका के शवों को लेकर आनंदपुरी पहुंचे तो कोहराम मच गया। दोनों की शादी को दो महीने होने वाले थे, उससे पहले ही दर्दनाक हादसे ने उन्हें छीन लिया। वहीं सोमवार सुबह जब दोनों की एक अर्थियां उठीं तो मंजर देख हर कोई रो पड़ा। कोई पिता को संभाल रहा था तो कोई बेहोश मां और बहन को। इस दौरान छोटे भाई अक्षय ने किसी तरह सभी को संभाला। इसके बाद सूरजकुंड पर दोनों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया।