सहारनपुर में दुर्गा अष्टमी पर जिला महिला अस्पताल में कई बेटियां जन्मी हैं। खास यह नहीं है कि बेटियां जन्मी, बल्कि खास बात यह है कि बेटियों के जन्म पर परिवारों में वही खुशी है जो एक बेटे के जन्म पर होती है।
सबसे अधिक गौर करने वाली बात यह रही कि बहुओं की सास यानी नवजात बच्चियों की दादियां खुश हैं, जिन पर आरोप लगते हैं कि बेटियों के जन्म पर सबसे अधिक परेशान वही होती हैं। अमर उजाला की टीम ने जिला महिला अस्पताल में जन्मी बच्चियों के परिजनों से बात कर बेटियों के जन्म पर उनकी सोच को समझने का प्रयास किया। पेश है कुछ परिवारों से हुई बातचीत..
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- फोटो : अमर उजाला
नकुड़ के गांव रामगढ़ निवासी शिवानी ने बेटी को जन्म दिया है। उसका यह पहला बच्चा है। बेटी के जन्म पर मां शिवानी से अधिक दादी खुश थीं, जो नवजात बच्ची को गोद में लिए बार-बार निहार रही थीं और कभी उसका मुंह चूम रही थीं। दादी ने बताया उसकी खुद की तीन बेटियां और एक बेटा है। पूरे खानदान के छह घरों में पहले से 11 बेटियां हैं। बच्ची के जन्म पर परिजनों के खुश होने से मां शिवानी की खुशी बढ़ी है। अब बेटा और बेटी में फर्क नहीं है।
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गंगोह निवासी पिंकी ने तीसरा बच्चा जन्मा है, जो बेटी है। जिला महिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती पिंकी के साथ सास कुसुम जच्चा और बच्चे की देखभाल करती मिली। कुसुम ने बताया कि पिंकी के पास पहले से दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी है। यह तीसरा बच्चा है। कुसुम का कहना है कि आज के दौर में लड़कों से अच्छी लड़कियां हैं। लड़कियां भी आज हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर काम कर नाम कमा रही हैं। वह बच्ची के अष्टमी पर जन्म लेने से बेहद हैं। उनका कहना है कि बेटी नहीं देवी आई है।
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नागल क्षेत्र के गांव कपासी निवासी मोनिका की भी पहली डिलीवरी हुई है। उसने भी बेटी को जन्म दिया है। मोनिका के साथ वार्ड में पति मुकेश मिले। मुकेश बेटी के जन्म पर खासे उत्साहित हैं। यह उनका पहला बच्चा है। उन्होंने पहले से सोचा था कि बेटा हो या बेटी उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बस जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहने चाहिए। वह अपनी बेटी को खूब पढ़ाकर एक अच्छा इंसान बनाएंगे।
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बेहट के नौरंगपुर निवासी अंजीता भी जिला महिला अस्पताल में भर्ती हैं, जिन्होंने दुर्गा अष्टमी पर बेटी को जन्म दिया है। उनका यह पहला बच्चा है। अंजीता के चेहरे पर बार-बार आ रही मुस्कान उसकी खुशी को बयां कर रही थी। अंजीता की मां यानी नवजात की नानी ओमी भी मिली। ओमी ने बताया कि अब लड़का और लड़की में कोई फर्क नहीं रह गया है। उनका कहना है कि बच्ची के पैदा होने से वह उतनी ही खुश हैं, जिनता बेटे के पैदा होने पर होती।