नेशनल हाइवे स्थित होटल ब्लैक पेपर में शुक्रवार रात अराजकता का आलम यह था कि सरकारी पिस्टल भी निकल आई। दरोगा, पार्षद और महिला तीनों ही पिस्टल के साथ जूझते रहे। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे में यदि गोली चल जाती तो कौन जिम्मेदार होता? मोहिउद्दीनपुर चौकी इंचार्ज सुखपाल पंवार अपनी सर्विस पिस्टल के साथ होटल में मौजूद थे। वहां ऐसी स्थितियां पैदा हुईं कि बवाल हो गया। दरोगा की पिटाई हुई। महिला से अभद्रता हुई। जमकर हंगामा हुआ। महिला ने भी होटल में क्रॉकरी तोड़ी। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खतरनाक स्थिति उस समय पैदा हो गई जब दरोगा सुखपाल पंवार की सरकारी पिस्टल कवर से बाहर आ गई। दरोगा, होटल मालिक /पार्षद मनीष पंवार और महिला तीनों ही दरोगा सुखपाल की सरकारी पिस्टल से जूझने लगे। यह वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है। जिसमें साफ नजर आ रहा है किस तरह से दरोगा, पार्षद और महिला तीनों ही इस पिस्टल को थामे हैं।
ताजा हो सकता था लखनऊ कांड... सरकारी पिस्टल से हुआ खिलवाड़, छीनाझपटी करते रहे पार्षद, दरोगा और महिला
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सीन:01
वायरल वीडियो के अनुसार विवाद के समय दरोगा और महिला सोफे पर बैठे हैं जबकि पार्षद उनके सामने खड़ा हुआ है। पार्षद मनीष पिस्टल की बैरल को पकड़े हुए है, तो दोनाें हाथों से दरोगा अपनी सर्विस पिस्टल को जकड़े हुए है। वहीं, महिला पिस्टल की बट को पकड़े हुए है।
सीन 02:
महिला काफी तेज चिल्ला रही है। सुना जा रहा है कि ...मेरा फोन दे... मेरा फोन दे। इस बीच पार्षद द्वारा चिल्लाते हुए दरोगा को यह कहते सुना जा रहा है कि हां गोली मरवा। हम भी देखें। दारोगा द्वारा कहा जा रहा है कि सुनो! सुनो! दरोगा द्वारा पिस्टल छोड़ने की बात कही जा रही है। इस खींचतान में यदि गोली चल जाती तो क्या होता।
सीन 03:
बाद में होटल मालिक पिस्टल की बैरल छोड़ देता है। दरोगा तब महिला को समझाकर उसका हाथ भी पिस्टल से छुड़वाकर वापस पिस्टल कवर में रख लेता है और तुरंत खड़े होकर डोरी को कस लेता है। इस बीच महिला सोफे से उठकर मेन गेट की तरफ बढ़ने का प्रयास करती है तो होटल मालिक उसे सोफे की तरफ धक्का दे देता है। इसके विरोध स्वरूप महिला चिल्लाते हुए टेबल पर रखी क्रॉकरी को उठाकर फेंकना शुरू कर देती है।
...तो ताजा हो जाता लखनऊ कांड
इस वीडियो को देखने से साफ है कि दरोगा की सर्विस पिस्टल को लेकर किस तरह से जद्दोजहद चलती रही। सवाल यहां यह भी है कि इस छीनाझपटी में यदि लापरवाही वश गोली चल जाती तो अनहोनी होने में देर नहीं लगती। गनीमत रही कि दरोगा ने गोली नहीं चलाई। नहीं तो लखनऊ में पिछले दिनों एपल के मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या का प्रकरण अभी लोग भूले नहीं है।