शातिर बदन सिंह बद्दो पर मेरठ का पुलिस-प्रशासन पर्दे के पीछे से मेहरबान थी। बद्दो पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही थी। हैरानी की बात है कि फरारी के 19 महीने तक पुलिस बद्दो की आलीशान कोठी नहीं दिखाई दी।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस को दिखी 'बद्दो' की कोठी, भाभी का घर बताकर पौने दो साल तक झाड़ती रही पल्ला
ढाई लाख के इनामी बद्दो की तलाश में यूपी पुलिस के साथ ही यूपी एसटीएफ, एटीएस और पंजाब पुलिस समेत तमाम एजेंसियां जुटी रहीं। लेकिन मेरठ पुलिस ने मोस्ट वांटेड बद्दो की घेराबंदी के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। बद्दो पर पुलिस प्रशासन मेहरबान क्यों था, यह बात कोई नहीं समझ पाया। बद्दो शातिर अपराधी था, फरारी से पहले भाभी के मकान को ध्वस्त करा दिया, ताकि पुलिस कोई कार्रवाई न करा सके। बद्दो की कोठी का यह आंख मिचौली का खेल 19 महीने तक चला।
लंबे समय बाद भूमाफिया घोषित
जून 2020 को एडीजी राजीव सभरवाल ने मेरठ जोन की कमान संभाली। बद्दो फरारी प्रकरण में हुई कार्रवाई की समीक्षा में सामने आया कि बद्दो पर जमीन पर कब्जे, शराब कारोबार से जुड़े मुकदमे सबसे ज्यादा हैं। लेकिन उस पर निरोधात्मक कार्यवाही नहीं की गई।
एडीजी के निर्देश पर करीब एक माह पहले ही बद्दो को भूमाफिया घोषित किया गया। लेकिन उसके बाद भी बद्दो पर मजबूत कार्रवाई की बात सामने आती तो पुलिस पल्ला झाड़ देती कि उसके नाम कोई भी संपत्ति नहीं है। जिस मकान में बददो रहता था, वह उसकी भाभी कुलदीप कौर के नाम है। यह सुनकर अधिकारी भी चुप्पी साध लेते थे।
हाईकोर्ट ने पुलिस को जगाया
अपराधियों की अवैध संपत्ति को लेकर हाईकोर्ट भी सख्त है। सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक सोम की याचिका पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। हाईकोर्ट ने मेरठ पुलिस ने पूछा कि बद्दो के खिलाफ क्या कार्रवाई की, जिसको लेकर अपर प्रमुख सचिव गृह को तलब कर लिया। इसके बाद पुलिस ने बद्दो की कोठी भी तलाश ली और करीब दो करोड़ की संपत्ति कुर्क कर ली।
संदेह में पुलिस की कार्यशैली
शातिर अपराधियों के खिलाफ मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश भर में कार्रवाई हुई। जिसमें योगेश भदौड़ा, ऊधम सिंह, शराब माफिया रमेश प्रधान की अवैध संपत्ति कुर्क की गई। जबकि प्रदेश में सबसे बड़े अपराधी बदन सिंह बद्दो पर कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधी जा रही थी। कई बार पुलिस अधिकारियों ने बद्दो के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहीं, लेकिन मकान उसकी भाभी का बताकर पुलिस खामोश हो जाती।
पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं कि करीब 19 महीने तक पुलिस बद्दो की आलीशान कोठी क्यों नहीं तलाश पाई। जबकि इसी कोठी में बद्दो और उसका बेटा सिकंदर रहता था। यह कार्रवाई बद्दो और सिकंदर दोनों पर हुई है। दोनों ही वांटेड है। ब्रह्मपुरी पुलिस ने दोनों के नाम से कुर्की वारंट मांगा था, जिसको कोर्ट ने स्वीकार कर कुर्की करने का आदेश दिया।