फार्म हाउस में सल्फास खाने के बाद हरिओम आनंद को सीधे आनंद अस्पताल लाया गया था। करीब दो घंटे तक वह जीवित थे। इस बीच बेटी, अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ से बातचीत भी की थी। लेकिन पुलिस को सूचना मौत के बाद दी गई। मृत्यु पूर्व बयान हो जाते तो कई लोग कठघरे में खड़े होते। वहीं पिता की ये बात सुनकर रो पड़ी थी बेटी-
2 of 6
amnand medical meerut, hariom aanand suicide
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब 2:07 पर हरिओम आनंद हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे, लेकिन पुलिस को सूचना नहीं दी गई। इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर क्यों छिपाने की कोशिश होती रही? परिजनों ने पहले पोस्टमार्टम कराने से क्यों इनकार किया था? पुलिस का कहना कि उस वक्त सूचना मिल जाती तो वह तुरंत ही मजिस्ट्रेट को बुलाकर बयान करा सकती थी। तब किसकी कितनी देनदारी है? किसका किस तरह का दबाव था? यह सारे राज खुल जाते।
3 of 6
amnand medical meerut, hariom aanand suicide
- फोटो : अमर उजाला
हरिओम आनंद का एसएसपी के नाम लिखा पत्र भी उनकी मौत के बाद सौंपा गया। इससे पहले उन्होंने कभी पुलिस प्रशासन के आला अफसरों से शिकायत नहीं की थी।
4 of 6
amnand medical meerut, hariom aanand suicide
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस का मुखबिर तंत्र भी फेल
हरिओम आनंद ने मुंडाली के मुरलीपुर स्थित अपने फार्म हाउस में सल्फास खाया। इसके बाद ड्राइवर फारूक उन्हें लेकर आनंद अस्पताल आया। अस्पताल में दो घंटे तक इलाज चला। इसके बावजूद भी पुलिस को इसकी भनक नहीं लगी। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस का मुखबिर तंत्र फेल हो गया है।
5 of 6
अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
गमगीन माहौल में हरिओम आनंद का अंतिम संस्कार
आनंद हॉस्पिटल के मालिक हरिओम आनंद का रविवार को अंतिम संस्कार हो गया। शनिवार को सल्फास खाकर उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद पार्थिव शरीर को परिवार को सौंपा गया। पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों ने यह साफ कर दिया है उनके शरीर पर चोट या अन्य किसी भी प्रकार का कोई निशान नहीं मिला है। जहरीला पदार्थ खाने से ही उनकी मौत हुई है। बिसरा सुरक्षित रखते हुए सील कर दिया गया है। जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा।