आज से चैत्र नवरत्रि का शुभारंभ हो गया है। दुर्गा माता का पहला स्वरूप मां शैलपुत्री की आज पूजा होती है। भक्त सुबह से ही मंदिरों में कतारे लगाकर माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मेरठ सहित पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों के तमाम प्राचीन मंदिरों में भी श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना करने के लिए लाइन में लगे दिखे। इन तमाम मंदिरों में भक्तों ने अपने-अपने तरीके से माता की पूजा की।
सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों के बीच आदिशक्ति मां शाकंभरी देवी मंदिर स्थित है। यह वेस्ट यूपी का विख्यात सिद्धपीठ है। मान्यता है कि पुरातन युग में जब राक्षसों के घोर पाप के कारण सृष्टि पर अकाल पड़ गया था, तब सभी देवताओं ने मिलकर शिवालिक पर्वत श्रृंखला की प्रथम शिखा पर पूर्ण भक्ति भावना, आस्था एवं श्रद्धा से ओतप्रोत होकर मां जगदंबा की आराधना की थी। इससे प्रसन्न होकर अंतत: मां भगवती प्रकट हुई और उन्होंने अपनी माया का चमत्कार दिखाते हुए अकाल ग्रस्त पृथ्वी लोक से भूख और प्यास के प्रकोप को दूर किया था। माता ने धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले बाबा भूरादेव को वरदान दिया था कि उनके दर्शनों के उपरांत ही श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। धारणा है कि सिद्धपीठ में शीश नवाने से प्राणी सर्व सुख सम्पन्न हो जाता है।
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देवबंद सिद्ध पीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर
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देवबंद सिद्ध पीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर पश्चिम उत्तर प्रदेश में भक्तों की आस्था का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव यहीं पर स्थित देवी वन में कुछ समय के लिए ठहरे थे। मुख्य पुजारी पंडित सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी पिंडी रूप में विराजमान है।
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सहारनपुर के चिलकाना में देवी बाला सुंदरी का प्राचीन मंदिर
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सहारनपुर के चिलकाना में देवी बाला सुंदरी का प्राचीन मंदिर बस स्टैंड के पास स्थित है। मान्यता है कि करीब सौ साल पहले इलाके में प्लेग की भंयकर बीमारी फैली थी। उस समय किसी अद्रश्य शक्ति ने एक बाल विधवा को स्वप्न में आकर कस्बे में एक मंदिर बनाने के लिए कहा था। मंदिर बनने के बाद से बीमारी समाप्त हो गई थी। तभी से यहां भक्त जन अपनी मनोकामना पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाने आते हैं। चेत्र माह की चतुर्दशी को यहां भव्य मेला लगता है।
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मुजफ्फरनगर में सिद्धपीठ मां श्री गोकुला देवी मंदिर
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मुजफ्फरनगर के शाहपुर कस्बे में स्थित सिद्धपीठ मां श्री गोकुला देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। इस सिद्धपीठ पर जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से आकर मन्नत मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। चैत्र नवरात्र के बाद नवमी से चतुर्दशी तक मां गोकुला देवी का विशाल मेला लगता है।
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प्राचीन काली माता मंदिर
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पुरकाजी से करीब दो किलोमीटर दूर लक्सर मार्ग पर गांव सेठपुरा में प्राचीन काली माता मंदिर है। जिसका महत्व है कि जो भी श्रद्धालु इस मंदिर में आकर काली माता के चरणों में शीश निवाकर माता से मन्नतें मांगते हैं। माता उनकी मन्नतें अवश्य पूरी करती हैं। नवरात्रों के दिनों में व प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। मंदिर में शिव परिवार के अलावा बजरंग बली और शनिदेव महाराज की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मंदिर पुजारी ब्रज मोहन का कहना है कि पुरकाजी क्षेत्र के अलावा उत्तराखंड और अन्य दूर दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुजन मंदिर में आते रहते हैं।
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