खेल का मैदान हो या पढ़ाई, मेरठ के युवा हर जगह नाम रोशन कर रहे हैं। शिक्षा का इस्तेमाल कर कोई गांवों में किसानों को नई विधि से खेती करने का प्रशिक्षण दे रहा है तो कोई अपने पैरों पर खड़े होने के बाद दूसरे युवाओं को प्रेरणा दे रहा है। आज राष्ट्रीय युवा दिवस पर हम ऐसे ही युवाओं से आपको परिचित करा रहे हैं।
राष्ट्रीय युवा दिवस: मिलिए इन युवाओं से, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में कमाया बड़ा नाम, तस्वीरें
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किसानों-युवाओं को दे रहे मशरूम उगाने का प्रशिक्षण
मेरठ कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधार्थी जितेंद्र कुमार और हिमांशु अपनी पढ़ाई और तकनीकी ज्ञान का उपयोग कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मशरूम उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे जहां एक ओर भूमिहीन किसान व महिला उद्यमियों की आय बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर कृषि अवयवों की कंपोस्टिंग कर पर्यावरण को भी प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा। जितेंद्र ने मशरूम किसानों व उद्यमियों को वर्ष भर क्वालिटी स्पान, मशरूम बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पान लैब की भी स्थापना की है। सफेद बटन मशरूम के अतिरिक्त औषधीय गुणों से भरपूर दूसरे मशरूम जैसे किंग ओयस्टर, पोर्टोबेलो, क्रिमिनी मिल्की और शिटाके मशरूम कल्टीवेशन के लिए मेरठ कॉलेज की मशरूम प्रयोगशाला में भी किसानों और युवा उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
स्टार्टअप शुरू कर दूसरे युवाओं को दे रहीं दिशा
रुड़की रोड राजनकुंज निवासी राधिका ओबेराय ने डीयू से बीएससी होम साइंस की। इसके बाद उनको लगा कि इस क्षेत्र में कुछ अलग किया जाए। फिर उन्होंने डिजाइनिंग के कोर्स किए। इसके बाद कन्फेक्सनरी एंड आर्ट में डिप्लोमा कोर्स किया। उन्होंने ऑनलाइन कस्टमाइज केक कंपनी शुरू की। मोन पैराडिस नाम से वे सोशल मीडिया पर अपना बिजनेस कर रही हैं। वे बेकिंग से लेकर डिजाइन तक खुद ही सारा काम करती हैं। डिजाइनर केक को मेरठ से बाहर भी लोग पसंद कर रहे हैं।
नौकरी छोड़कर जरबेरा उगा रहे दिग्विजय
तहसील सरधना के गांव सलावा निवासी युवा किसान दिग्विजय सिंह इंजीनियर की नौकरी छोड़कर पिछले तीन साल से जरबेरा फूल की खेती कर रहे हैं। पारंपरिक गन्ना बेल्ट में पॉली हाउस के तहत जरबेरा फूल की खेती कई मायनों में अनोखी है। एक एकड़ जमीन पर तीन साल पहले 60 लाख रुपये लागत से परियोजना शुरू की। इसमें करीब 30 लाख रुपये सरकार ने अनुदान दिया हैं। पहले साल में करीब 50 हजार प्रतिमाह का मुनाफा होना शुरू हो गया था।
अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में पहुंचे मुस्कान के चित्र
सुभारती फाइन आर्ट कॉलेज में पेंटिंग की छात्रा मुस्कान के चित्रों ने 2020 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल में स्थान पाया। शिक्षिका डॉ. पूजा गुप्ता से चित्रकारी सीख रही मुस्कान को राजा रवि वर्मा, पिकासो की पेंटिंग्स पसंद हैं। वह कहती हैं पिछले सालों में विभिन्न चित्र प्रदर्शनी में मेरे चित्र पहुंचे, पुरस्कार मिले लोगों ने सराहा अच्छा लगा। लेकिन साल 2020 में जो सराहना मिली है वो मैं नहीं भूल सकती।