मुजफ्फरनगर में कवाल कांड में मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के मामले में कोर्ट ने सात लोगों को दोषी मानने के बाद आज शुक्रवार को सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। कोर्ट द्वारा हत्याकांड में फैसला सुनाए जाने को लेकर बुधवार की सुबह से ही कवाल और मलिकपुरा में भारी पुलिस व पीएसी बल तैनात कर दिया था। देखें कैसी रही कवाल की स्थिति
मुजफ्फरनगर दंगा: अदालत के फैसले के बाद कवाल और मलिकपुरा में पीएसी तैनात, कड़ी हुई सुरक्षा
गुरूवार को गांव में सामान्य हालात रहे। गांव में चहल पहल रही और प्रतिदिन की तरह बाजार भी खुले। ग्रामीणों में कोर्ट के फैसले को लेकर पूरे दिन चाय की दुकान व चौराहों पर आपस में चर्चा होती रही। इसके अलवा कुछ ग्रामीणों का कहना है कि न्यायालय के फैसले का सभी लोगों को सम्मान करना चाहिए। कवाल कांड में दोनों पक्षों को समान न्याय मिलना चाहिए।
बुलंदशहर जेल से लाया गया एक मुल्जिम
बुलंदशहर जिला कारागार में बंद मुजम्मिल को एडीजे कोर्ट संख्या-7 में सजा सुनाए जाने को पेश किया गया। अभी तक इस केस में उसकी पेशी वीडियो कांफ्रेसिंग से हुई है। मुकदमे में दोषी ठहराए जाने के समय पिता नसीम अहमद ने उसके अस्वस्थ होने पर उसका इलाज एम्स दिल्ली में कराने की मांग की थी।
सजा पर टिकी रहीं सभी की निगाहें
कवाल कांड में आरोपियों की सजा पर सभी की निगाहें टिकी रहीं। लखनऊ और दिल्ली से भी सीधी निगाहें इस फैसले पर टिकीं रहीं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आने वाले इस निर्णय के दूरगामी परिणाम होंगे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए कवाल कांड ने देश की सियासत की दिशा बदल दी थी। इन दंगों ने राजनीति का ऐसा ध्रुवीकरण किया कि बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों के आंकडे़ फेल हो गए। किसी ने इसे मोदी लहर तो किसी ने इसे भाजपा लहर का नाम दिया।
घटना के ठीक साढ़े पांच साल बाद कवाल में हुई सचिन और गौरव की हत्या पर निर्णय आया है। अदालत सात आरोपियों को दोषी ठहरा चुकी है। इनको आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। सजा को लेकर राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा बेचैनी थी। विपक्षी दल खासकर सपा, बसपा और रालोद इस निर्णय को अपने नजरिए से देख रहे हैं। इस निर्णय से कितना सियासी नफा-नुकसान होगा। इस पर लखनऊ और दिल्ली में मंथन शुरू हो चुका है।