मेरठ में बढ़ते प्रदूषण को लेकर काफी परेशानी हो रही है। प्रदूषण केंद्र की तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदूषण स्तर कम होने का नाम नही ले रहा है। स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राएं, बच्चे-बूढ़े व अन्य लोगों को काफी परेशानियों का समाना करना पड़ रहा है। ऐसे में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के आदेश के बाद शहर में 42 उद्यमियों ने जेनरेटर पर आधारित अपने उद्योग बंद कर दिए हैं। इससे उद्यमियों को प्रतिदिन 1.5 करोड़ का नुकसान हुआ है।
Meerut pollution: वायु गुणवत्ता आयोग ने बंद कराए 42 उद्योग, धुएं, पराली और कूड़ा जलने से बढ़ रहा प्रदूषण
उद्योगों पर प्रतिबंध अनुचित
टायर या अन्य प्रदूषण फैलाने वाले उद्यमों पर प्रतिबंध लगाना उचित है लेकिन जो उद्योग सभी मानक पूरे कर रहे हैं उन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। - कमल ठाकुर, अध्यक्ष, विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एस्टेट।
कारोबार को खत्म करने की तैयारी
उद्योगों को खत्म करने के लिए बार-बार आदेश दिए जा रहे हैं। प्रदूषण के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सिर्फ उद्योग पर पाबंदी लगाई जा रही है।- राजकुमार शर्मा, संभाग महासचिव, लघु उद्योग भारती।
गली-गली में जल रहा कूड़ा
उद्योग के पास खेतों में पराली जलाई जा रही है। निगम क्षेत्र में कूड़े के ढेर में आग लगाई जा रही है। जेनरेटर को एक घंटे चलाने की अनुमति दी गई अब उस पर भी रोक लगा दी गई। जेनरेटर में इंजन होता है वही इंजन वाहनों में भी होता है। - सुमनेश अग्रवाल, चेयरमैन, आईआईए।
लगातार बंद हो रहे उद्योग
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के पहले आदेश के बाद बड़ी संख्या में उद्योग दिल्ली एनसीआर से बाहर शिफ्ट हो गए हैं। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप)के आदेश के बाद 40 से अधिक उद्यमियों ने निर्माण कार्य बंद कर दिया है। उद्योगों को लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं। - निपुन जैन, अध्यक्ष, परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन