यदि आप पाव, केक और बिस्कुट के हैं शौकीन, इन बेकरियों की तस्वीर देखकर छोड़ देंगे खाना
शहर और छावनी क्षेत्र में करीब 180 बेकरी संचालित हैं। प्रतिष्ठित बेकरियों में तो स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है। हाईटेक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। हालांकि इसके विपरीत शहर की करीब 150 बेकरियां खाद्य पदार्थ निर्माण के मानकों का पालन नहीं कर रही है। 50 साल से ज्यादा समय से चल रहीं इन बेकरी में चूहे और कॉकरोच खाद्य पदार्थ पर घूमते मिल जाएंगे। कच्चा माल तैयार करने में भी मानक ताक पर रखे रहते हैं। निमभन स्तर पर मैदा प्रयोग किया जाता है।
यह भी पढ़ें: तस्वीरें देखकर टमेटो सॉस से कर लेंगे तौबा, खतरनाक केमिकल व सड़ी सब्जियां, गंदगी में हो रहा तैयार
शाकाहारी हैं तो छोड़ दें पाव
पाव, पेटीज, केक या बिस्कुट आदि बेक्ड खाद्य पदार्थ बिना अंडे के नहीं बन सकते हैं। चमक के साथ इसे कुरकुरा बनाने के लिए इसमें कच्चे अंडे का लेप लगाया जाता है। बेक होने के बाद इसमें बिल्कुल अलग महक आती है। आटे के बिस्कुट भी बिना मैदा के नहीं बनते।
‘रस्क’ के साथ एक प्याली चाय
शहर की करीब 40 फीसदी आबादी चाय के साथ ‘रस्क’ का प्रयोग करती है। ब्रांडेड के स्थान पर भारी संख्या में लोग खुले रस्क का सेवन करते हैं। हालांकि गंदगी में बनने वाले ये रस्क भी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
रेस्टोरेंट में खतरनाक हैं ‘पाव भाजी’
शहर के प्रतिष्ठित और बड़े रेस्टोरेंट में बेकरी से ही पाव सप्लाई होती है। स्वच्छता का दावा करने वाले बड़े रेस्टोरेंट संचालक सस्ते के लालच में यहीं से पाव खरीदते हैं। ब्रांडेड बटर की महक में पाव की महक दब जाती है। कुछ लोगों को जब पेट आदि से संबंधित समस्या होती है तो वे इसका कारण नहीं समझ पाते।