मेरठ में तेल के काले कारोबार के खुलासे को आज शुक्रवार को एक माह हो गया। इस मामले में केमिकल फैक्टरी के मालिक समेत 11 लोगों को भले ही पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा। लेकिन पुलिस को अभी विवेचना के लिए मुख्य साक्ष्य सैंपल रिपोर्ट का इंतजार है। मान लिया जाए कि सैंपल रिपोर्ट तो फोरेंसिक लैब से आएगी। लेकिन भूमिगत टैंकों की खोदाई तक भी पुलिस प्रशासन नहीं करा सका। इन टैंकों में ही 2.20 लाख लीटर मिलावटी ऑयल/केमिकल का दावा किया जा रहा है।
तेल के काले कारोबार का पर्दाफाश हुए बीत गया महीना, लेकिन नहीं हुई टैंकों की खुदाई, अटकी कार्रवाई
आईजी रेंज आलोक सिंह के निर्देश पर 20 अगस्त को एसपी देहात अविनाश पांडेय ने पूठा और वेदव्यासपुरी में तेल के काले कारोबार का पर्दाफाश किया था। जिसमें पुलिस ने पारस केमिकल फैक्टरी और गणपति केमिकल फैक्टरी पर कार्रवाई की थी। जिसके बाद पुलिस ने पहले दस आरोपियों और बाद में एक अन्य केमिकल व्यापारी को जेल भेजा था।
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पूरे प्रकरण की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। मजिस्ट्रेटी जांच भी चल रही है। मिलावटी तेल के सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक लैब निवाड़ी गाजियाबाद, लखनऊ और दिल्ली की सेंट्रल लैब भेजे गए। जिन तीन पेट्रोल पंपों से सैंपल लिए थे, उन्हें भी जांच के लिए लैब भेजा गया है। लेकिन एक माह में अभी तक सैंपल रिपोर्ट नहीं आई।
वहीं, वेदव्यासपुरी में 2.20 लाख लीटर मिलावटी तेल भूमिगत टैंकों में भरा है। मौके पर पुलिस लगाई गई। लेकिन टैंकों की खोदाई भी नहीं हुई। ऐसे में यह तेल गायब हुआ या कोई अनहोनी हो गई तो कौन जिम्मेदार होगा। वही, फोरेंसिक लैब से इन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई कि मिलावटी तेल में कौन सा केमिकल था, कितनी मात्रा में था, कौन-कौन से पदार्थ मिलाए गए, कौन सा रंग मिलाया गया। पुलिस अफसरों का कहना है कि विवेचना चल रही है।
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डीएसओ ने चस्पा किया नोटिस
मैसर्स रतिराम खूबचंद फर्म पर आपूर्ति विभाग की टीम ने गुरुवार को नोटिस भी चस्पा किया। यह डीएसओ द्वारा चस्पाया गया, जिस पर 13 सितंबर की तारीख लिखी है। नोटिस में लिखा है कि सात सितंबर को एडीएम सिटी, आपूर्ति विभाग की टीम व पुलिस ने मै. रतिराम खूबचंद, कुंडा परतापुर में केरोसिन के थोक के गोदाम (आईओसीएल) का निरीक्षण किया था। जहां चार भूमिगत टैंक पाए गए। जांच में 71888 लीटर केरोसिन का अवैध स्टॉक पाया गया। फर्म के मालिक संजय कुमार और मैनेजर विक्की कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बरती गई अनियमितताओं एवं लाइसेंस की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करने के कारण फर्म का लाइसेंस भी जिलाधिकारी द्वारा निलंबित किया जा चुका है। फर्म प्रोपराइटर को निर्देशित किया गया है कि कि अपना लिखित उत्तर 15 दिन के अंदर देना निश्चित करें। नहीं तो फर्म प्रोपराइटर स्वयं उत्तरदायी होंगे।
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