एंटी हृयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) पुलिस की रविवार को मेरठ के होटल में की गई छापामारी पर सवाल उठने लगे हैं। यहां बेगमपुल स्थित ऑसम होटल में सेक्स रैकेट का हल्ला मचाने वाली पुलिस रविवार रात में ही बैकफुट पर आ गई और युवक-युवतियों को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया। सवाल है कि जब इनका कोई अपराध नहीं बनता था तो पुलिस ने दस घंटे तक हिरासत में रखकर बदनाम क्यों किया।
यूपी: तो क्या मेरठ के होटल में नहीं चल रहा था देह व्यापार..., एचटीयू पुलिस की छापेमारी पर उठे सवाल
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दोपहर से ही पुलिस सेक्स रैकेट का हल्ला मचा रही थी। जहां पुलिस ने सभी युवती व युवकों के परिजनों को भी बुला लिया। लेकिन रात में पुलिस ने किसी कार्रवाई से मना कर दिया। अधिकांश युवतियां अपने प्रेमी के साथ अलग-अलग कमरे में मिली। कई युवती ऐसी थीं जिनकी शादी तय हो चुकी है और मंगेतर के साथ गईं थीं। पुलिस ने 36 युवक-युवतियों को रविवार देर रात परिजनों की सुपुर्दगी में सौंप दिया।
आखिर क्यों किया बदनाम
शहर के कई शिक्षण संस्थानों की युवतियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। वहीं, युवकों में पीएसी का सिपाही व देहात क्षेत्र का एक शिक्षक भी था। ऐसे में सभी बालिग पाए गए। जांच में वह आईडी प्रूफ देकर कमरों में ठहरे हुए मिले। इसमें कई मंगेतर तो ज्यादातर प्रेमी-प्रेमिका थे।
पुलिस को सेक्स रैकेट जैसी बात जांच में नहीं मिली। इन सभी को होटल से भी छोड़ा जा सकता था। लेकिन दस घंटे तक पुलिस ने थाने में रखकर बदनाम किया और परिजनों को बुलाया।
मैनेजर समेत छह जेल भेजे
पुलिस के अनुसार होटल मैनेजर सुधीर कुमार, अकाउंटेंट प्रखर रस्तागी, पंकज कुमार, रवि, दीपक और अशोक को गिरफ्तार किया है। होटल मालिक उमेश गर्ग फरार है। इन पर पुलिस से मारपीट करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, बलवा व जान से मारने की धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। दरोगा मनोज कुमार ने लालकुर्ती थाने में दर्ज कराया है। सोमवार को सभी छह आरोपियों को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया।
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बचाव में जुटे एसपी क्राइम
पूरे प्रकरण में एसपी क्राइम रामअर्ज के निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई की। लेकिन जब मामला सेक्स रैकेट का नहीं निकला तो एसपी क्राइम ने सीओ कैंट संजीव देशवाल और थानेदारों को आगे कर दिया। लेकिन बाद में एसपी क्राइम चुप्पी साध गए।