भारतीय सेना की नौवीं डिवीजन के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए जेसौर को फतेह किया तो 1971 के भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की तस्वीर बदल गई। पांच दिसंबर 1971 को बांग्लादेश फतेह के बाद ये तारीख भारतीय सेना के लिए इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई।
1971 की जंग में भारतीय सेना ने रचा था इतिहास, मेरठ की इस डिवीजन ने पाकिस्तानी सैनिकों को चटाई थी धूल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर साल की तरह इस बार भी जेसौर डे की जीत के मौके पर 6 दिसंबर गुरुवार को सेना की 9वीं डिवीजन की तरफ से पाइन वार मेमोरियल में सुबह 8:30 बजे कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सन 1971 में भारतीय फौज का नेतृत्व जनरल मानेकशॉ कर रहे थे। पूर्वी पाकिस्तान के जेसौर में दुश्मन फतेह का टारगेट सेना की 9वीं डिवीजन को दिया गया। वहीं नवंबर महीने के अंतिम दिनों भारतीय सेना ने जैसोर की तरफ कूच किया। 21 और 22 नवंबर को सेना की 9वीं डिवीजन ने इस युद्ध में अपना पराक्रम दिखाना शुरू किया तो युद्ध की सूरत बदलने लगी। चार और पांच दिसंबर को भारतीय सेना की पाकिस्तानी सेना से आमने-सामने की लड़ाई हुई। युद्ध में भारतीय सेना की 9वीं डिवीजन ने पाकिस्तानी सेना को नेस्तनाबूद कर दिया। जैसोर पर कब्जे के बाद भारतीय सेना खुलना की तरफ बढ़ गई।
बता दें कि 9 डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल दलबीर सिंह के नेतृत्व में भारतीय सेना ने वहां भी फतेह हासिल की। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना के हजारों सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा था। भारतीय सेना हर साल जैसोर डे मनाती है।
इस बार गुरुवार सुबह 8:30 बजे पाइन वार मेमोरियल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें वीर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित करते वीर नारियों का सम्मान किया जाएगा। सेना के पूर्व सैनिक और अफसर जैसोर युद्ध की कहानी बयां करेंगे।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/