उत्तरप्रदेश के मेरठ में मुंडाली ग्राम सिसौली निवासी सेना के जवान अनिल तोमर की शहादत की जानकारी मिलते ही सोमवार को गांव में मातम पसर गया।शहीद अनिल नवंबर में छुट्टी पर घर आए थे। कोरोना काल से घर में रह रहे बच्चे पापा से बाहर कहीं घूमने की जिद कर रहे थे। वह हर बार टाल देते थे कि जब हालात ठीक हो जाएंगे तो घूमने चलेंगे। 17 दिसंबर को उनकी छुट्टी पूरी हुई थी। जम्मू-कश्मीर के शोपियां में ड्यूटी पर जाने से पहले बच्चों से यह वादा करके गए थे कि अबकी बार जब छुट्टी पर आएंगे तो घूमने चलेंगे। बच्चों की यह तमन्ना अधूरी ही रह गई।
2 of 8
गांव में पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
18 दिसंबर को ही छुट्टी मना कर गए थे
अनिल तोमर नवंबर में एक महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे। छुट्टी के दौरान वे अधिकतर समय पिता के साथ खेती में हाथ बंटाते थे। अनिल तोमर अच्छे खिलाड़ी थे। हाल ही में सेना की तरफ से आयोजित 25 किलोमीटर की दौड़ में उन्होंने भाग लेकर जीत हासिल की थी।
3 of 8
विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार अनिल की शहादत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। परिजनों में कोहराम मच गया। आसपास के गांवों में इस सूचना के बाद शोक की लहर दौड़ गई। आसपास गांवों के लोग भी गमगीन पिता को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
4 of 8
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों के अनुसार अनिल तोमर का बहुत ही अच्छा व्यवहार था। इसके चलते ग्रामीण उसका काफी सम्मान करते थे। उसके पिता भी दोनों बेटों के सेना में होने पर बहुत गर्व करते थे। अनिल की शहादत की खबर मिलते ही परिजन उसकी पत्नी एवं बच्चों को मित्रलोक कॉलोनी स्थित घर से गांव सिसौली ले आए।
5 of 8
विलाप करते अनिल के पिता
- फोटो : अमर उजाला
फोन बंद हुआ तो भाई सुनील को भेजा कश्मीर
अनिल तोमर रात में परिजनों को कम ही फोन करते थे। 25 दिसंबर की शाम को उनकी पिता से बात हुई। हालचाल पूछने के बाद फोन कट गया। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। 26 दिसंबर को भी उनका फोन बंद ही रहा। परिजन चिंता में थे, वे जानते थे कि अनिल घातक प्लाटून का हिस्सा होने के कारण अक्सर आतंकी ऑपरेशन में जाते रहते थे। 27 दिसंबर को अनिल तोमर के एक साथी का परिजनों के पास फोन आया। उसने बताया कि अनिल को कई गोलियां लगीं थीं, अब ऑपरेशन हो गया है। चिंता न करें।