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यूपी: इंस्पेक्टर सुबोध से पहले ये 7 बहादुर पुलिसवाले भी ड्यूटी पर गंवा चुके हैं जान

Tue, 04 Dec 2018 02:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 04 Dec 2018 02:49 PM IST
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up police

इसे कमजोर कानून व्यवस्था कहें या फिर कहें कि लोगों में पुलिस प्रशासन का डर जेहन से निकल चुका है। अनियंत्रित भीड़ ने यूपी में अब तक जहां ढेरों लोगों को पीट पीटकर मौत के घाट उतार दिया तो वहीं असामाजिक तत्व पुलिस को भी निशाना बनाने से गुरेज नहीं कर रहे।



बुलंदशहर में गोकशी के अवशेष मिलने के बाद भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध की मौत इसका सबसे ताजा उदाहरण है। यह पहली बार नहीं है जब किसी दरोगा को भीड़ हिंसा में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा हो। इससे पहले भी कई बार अनियंत्रित भीड़ ने पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया है:-

Meerut, before Inspector Subodh kumar In these cases up police officers has lost their lives
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मथुरा के जवाहर बाग की घटना शायद ही कोई भूल पाता हो। यहां करीब सौ एकड़ की जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने पहुंची पुलिस और भीड़ के बीच हुए भीषण संर्घष में एसपी सिटी और एसओ ने अपनी जान गंवा दी थी। जानकारी के अनुसार जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां तकरीबन तीन हजार की संख्या में अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया।

इस दौरान जमकर पथराव और फायरिंग हुई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। दूसरी तरफ से बलवाइयों द्वारा की गई गोलीबारी में पुलिस अधीकक्षक मुकुल द्विवेदी और फाराह पुलिस थाने के प्रभारी संतोष कुमार की जान चली गई थी। 

Meerut, before Inspector Subodh kumar In these cases up police officers has lost their lives
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15 जून 2012 को यूपी के बरेली में इलाहाबाद हरिद्वार एक्सप्रेस में अज्ञात लोगों ने पुलिस के सिपाही राम निरंजन सिंह को सरेआम गोली मार दी थी। सिपाही प्रतापगढ़ के थाना फतनपुर निवासी थे। इसके अलावा 3 मार्च 2013 को भी बरेली में सिपाही की जान चली गई थी।

यहां बदमाशों ने पुलिस टीम पर उस वक्त हमला कर दिया जब पुलिस टीम बभिया गांव में एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई थी। तब पंद्रह बीस लोगों ने मिलकर हमला कर दिया, जिसमें सिपाही प्रदीप कुमार की मौत हो गई।

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बड़ा मामला 3 मार्च 2013 को हुआ जब यूपी के कुंडा क्षेत्र में दो गुटो के बीच हुई गोलीबारी की घटना में भीड़ को नियंत्रित में कुंडा के डीएसपी जिया उल हक को अपनी जान गंवानी पड़ी। प्रतापगढ़ के बलिपुर गांव में शाम के वक्त ग्राम प्रधान को चार लोगों ने गोलियों से भून दिया। इसके बाद गांव में बवाल हो गया।

सूचना पर डीएसपी जब गांव पहुंचे तो करीब तीन सौ लोगों की भीड़ जमा थी जिसमें कई लोग हथियार से लैस थे। भीड़ बेकाबू हो गई और उसने पुलिस पर हमला कर दिया। डीएसपी के साथी पुलिसकर्मी जान बचाकर भागे। इसी दौरान डीएसपी को बुरी तरह पीटा गया और फिर गोली मार दी गई।

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23 जून 2016 को यूपी के बदायूं में बाइक सवार बदमाशों ने गश्त के दौरान एक सिपाही और दरोगा की जान ले ली थी। यहां रात में गश्त के दौरान पुलिस टीम ने बदमाशों को रोकने की कोशिश की लेकिन बदमाशों ने फायरिंग कर दी। इसमें एक दरोगा सर्वेश यादव शहीद हो गये थे जबकि सिपाही प्रमोद वर्मा घायल हुए थे।

उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई। इसी दिन यूपी के हापुड़ कोतवाली क्षेत्र में उपनिरीक्षक सुखबीर सिंह की बेखौफ बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वे बागपत जिले में तैनात थे और किसी केस की विवेचना के लिए मेरठ जा रहे थे। 

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