उत्तर प्रदेश के मेरठ में आनंद अस्पताल के मालिक हरिओम आनंद अर्श से फर्श पर यूं ही नहीं आए। इसकी वजह उनकी महत्वाकांक्षा के अलावा साथ में काम करने वालों पर अति आत्मविश्वास भी रहा। जिसके चलते वह लगातार कर्ज में डूबते चले गए। आगे पढ़िए अस्पताल के भीतर की पूरी कहानी-
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हरिओम आनंद की मौत का मामला
- फोटो : अमर उजाला
हरिओम आनंद ने लोकप्रिय अस्पताल में विवाद के बाद 2007 में आनंद अस्पताल खड़ा किया था। शहर के नामचीन चिकित्सकों की टीम को साथ जोड़कर उस समय आनंद अस्पताल को मेरठ का सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल बना दिया था। लेकिन ज्यादा दिन यह नहीं चल पाया। इससे आगे जाने की महत्वाकांक्षा में वह आत्मघाती कदम उठा गए।
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आनंद अस्पताल
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उन्होंने एक तरफ जहां अस्पताल की जिम्मेदारी अपने चिकित्सकों की टीम और कर्मचारियों पर छोड़ दी, तो खुद अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा को पूरा करने में लग गए। इसके लिए उन्होंने शहर के कई फाइनेंसर तलाशे और उनसे पैसा लेकर जमीन खरीदनी शुरू कर दी। उनका ध्यान अस्पताल से हटा तो वहां पर गड़बड़ी शुरू हो गई। कर्मचारियों ने चांदी काटी तो चिकित्सकों की टीम ने भी अपनी मनमानी शुरू कर दी। इसमें पूरा नुकसान हरिओम आनंद को हुआ। हालात ये हो गए कि हरिओम आनंद का अस्पताल में शेयर 50 प्रतिशत से घटकर करीब तीन प्रतिशत पर आ गया।
नोटबंदी के बाद बिगड़ा पूरा मामला
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हरिओम आनंद की मौत का मामला
- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद पूरा मामला गड़बड़ा गया। होटल हारमनी इन के मालिक हिमांशु पुरी जब कर्ज के बोझ तले दबकर शहर से रातोंरात गायब हुए तो लोगों का ध्यान ऐसे तमाम लोगों पर गया जिन्होंने मोटा कर्ज शहर के धन्नासेठों से उठाया था। उस समय तक प्रॉपर्टी के रेट भी आधे हो चुके थे या यूं कहें कि खरीददार ही नहीं मिल रहे थे। ऐसे में लेनदारों ने हरिओम आनंद पर भी तगादा शुरू कर दिया। इस देनदारी को चुकाने और अपनी साख बचाने में हरिओम आनंद ने मोटा पैसा बहुत ही ऊंची ब्याज दर पर उठाया। जिसको चुकाते चुकाते जब वह थक गए। सूत्रों की मानें तो अंतिम समय में हरिओम आंनद ने तीन रुपये सैकड़ा की दर तक पर पैसा उधार लिया था। इसका ब्याज भी वह भर रहे थे, लेकिन अस्पताल के भीतर हो रही गड़बड़ी को वह समझ नहीं पाए।
अस्पताल के वास्तु दोष को भी लेकर है चर्चा
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रोती हरिओम आनंद की बेटी
- फोटो : अमर उजाला
आनंद अस्पताल के बराबर में जगह खरीदकर हरिओम आनंद ने वहां इमरजेंसी बनाई तो एक साइट में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कराया। इसके बाद से ही उनके अस्पताल में गड़बड़ी शुरू हो गई। आंतरिक विवादों के साथ ही तमाम विवाद शुरू हो गए। अस्पताल सूत्रों के अनुसार किसी ने उनसे कहा भी था कि इमरजेंसी और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट वास्तु के अनुसार ठीक नहीं हैं। इसमें सुधार करा लिया जाए, उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।