मेजर केतन शर्मा के पिता रविंद्र शर्मा ने बताया कि करीब 35 साल पूर्व कंकरखेड़ा आए थे तो पहले आर्मी कैंट एरिया में कासमपुर में रहते थे। यहीं पर केतन व मेघा दोनों बच्चों ने जन्म लिया। पास में ही सेना के जवानों व अफसरों का आना-जाना रहता था। केतन बचपन में खेलते समय जब भी किसी जवान या अफसर को उधर से आते-जाते देखते थे तो उन्हें सैल्यूट करते थे। उन्होंने उसी समय ठान लिया था कि वह भी एक दिन सेना में अफसर बनेंगे।
देश पर कुर्बान हो गए मेजर केतन शर्मा, बचपन में ही ठाना था आर्मी में बड़ा अफसर बनूंगा
कंकरखेड़ा की अशोका एकेडमी में 9वीं तक पढ़ाई करने के बाद केतन का दाखिला मेरठ पब्लिक स्कूल की मेन ब्रांच में कक्षा 10 में कराया गया था। यहां 10वीं व 12वीं में वे फर्स्ट रहे। यहां भी कैंट एरिया में सेना के अफसरों को देखते थे।
केतन ने परिजनों से साफ कह दिया था कि मुझे आर्मी अफसर बनना है। केतन ने सरूरपुर के संजय डिग्री कॉलेज से बीएससी की। उसके बाद दो साल तक गुरुग्राम में एक प्राईवेट कंपनी में जॉब भी की। लेकिन उसमें मन नहीं लगा और जॉब छोड़ दी।
साल 2011 में वे आईएमए देहरादून में भर्ती हुए। पासिंग आउट परेड के बाद साढ़े तीन साल पुणे में ट्रेनिंग हुई। फिर मेरठ की 57 इंजीनियर रेजीमेंट में पोस्टिंग हुई। मेरठ में कुछ दिन ही रहे। वर्तमान में जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में मेजर पद पर तैनात थे।
पिता रविंद्र शर्मा ने बताया कि बेटे केतन ने ठान लिया था कि उसे सेना में अफसर ही बनना है। उसके इरादे व हौसला देखकर उन्होंने उसे कभी रोका नहीं और जितना हो सका सपोर्ट किया। उन्हें खुद को नहीं पता कि वह कब सेना में अफसर बन गया। चयन हुआ तो केतन ने फोन करके उन्हें बताया था कि वह अफसर बन गया। सुनकर परिवार के लोग बहुत खुश हुए थे।
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