मुजफ्फरनगर के कवाल में स्थित दिगंबर जैन मंदिर पर लिखा 'अहिंसा परमो धर्म:' का संदेश उस दिन भूला दिया गया, जब यहां भरे बाजार मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी।
कवाल कांड: मामूली झगड़े ने दंगों की आग में झोंक दिया था पूरा जिला, उस दर्द को कभी याद नहीं करना चाहते ग्रामीण
27 अगस्त 2013 को जानसठ कोतवाली के गांव कवाल में साइकिल और बाइक टकराने को लेकर झगड़ा हुआ था। मलिकपुरा के सचिन और गौरव से हुई कहासुनी में कवाल के शाहनवाज की मौत हो गई। शाहनवाज की मौत के बाद ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई।
इस हत्याकांड को सांप्रदायिक रूप दिया गया और पंचायतों का दौर शुरू हो गया। गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने 27 अगस्त, 2013 को दोपहर 2:45 पर जानसठ कोतवाली में इस दोहरे हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज कराई। कई दिनों तक ज्ञापन और पंचायतों के बाद सात सितंबर को नंगला मंदौड़ की महापंचायत के बाद जिले में दंगा भड़क उठा।
महापंचायत से लौटते वक्त हुए हमले
नंगला मंदौड़ के इंटर कालेज के मैदान में हुई पंचायत से ट्रैक्टर ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से लौटते समय लोगों पर जौली गंगनहर पर हमले कर दिए गए थे।
घटना को सात साल हो गए। आज कवाल के बाजार में दुकानें खुली हैं। ग्रामीणों की आवाजाही है। चाय और समोसे की दुकान पर लोग बातचीत में मशगूल हैं। जानसठ रोड पर कवाल का मुख्य द्वार है। यहां से जो सड़क मलिकपुरा तक जाती है, उसी पर बाजार बना है। कहीं ज्वेलरी शॉप है तो कहीं मिस्त्री अपने हुनर में लगे हैं। ई- रिक्शा से गुजरती सवारियां दिखाई दीं, वहीं बैंक के बाहर ग्राहकों की कतार लगी थीं।
सौहार्द का केंद्र रहा है कवाल
कवाल सौहार्द का केंद्र रहा है। गांव में दिगंबर जैन मंदिर के साथ राधा-कृष्ण मंदिर और आदर्श रामलीला कमेटी का भवन है, तो दूसरी ओर मस्जिद है। करीब 14 हजार की आबादी वाला कवाल गांव इतिहास की कई यादें समेटे हुए है।
गांव के मौजूदा माहौल में ऐसा कतई महसूस नहीं होता कि यहां हुए तिहरे हत्याकांड से भाईचारे का विश्वास कभी टूट गया था। हालांकि लोगों के जेहन को वह घटना आज भी विचलित कर रही है। बुजुर्ग किसान रघुवीर सिंह कहते हैं कि न जाने किस अनहोनी से वह घटना हुई थी। फिलहाल सब मिल कर सौहार्द से रह रहे हैं।
पूर्व ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह ने कहा कि कवाल कांड ने आपसी भरोसे को क्षति पहुंचाई थी। हाजी तैयब का कहना है कि सदियों से सभी मिलजुल कर यहां रहे हैं। उक्त घटना कवाल के भाईचारे के लिए कलंक थी।
कारोबारी उस्मान ने कहा कि अब उस घटना को भूल जाना ही लोग बेहतर समझते हैं। ग्राम प्रधान नईमा के पति मोहम्मद इस्लाम कहते हैं कि घटना दुखद थी, जिसकी वजह से कवाल को बदनामी भी मिली। अब गांव का सौहार्द और आपसी भाईचारा मजबूत है। लोग घटना को भूल कर आगे बढ़ना चाहते हैं।