रंगबिरंगी कांवड़ व झांकियों के साथ शिवभक्त भगवान शिव के भजनों के साथ मंजिल की ओर बढ़ते जा रहे हैं। विशाल कांवड़ पर मनमोहक झांकियां श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। शिवभक्त डाक कांवड़ियों के काफिले हरिद्वार से गंगाजल लाने के लिए शहर से होकर गुजर रहे हैं। डीजे की धुन और हर-हर महादेव के जयकारों से शहर गुंजायमान हो रहा है। शिवभक्तों के स्वागत के लिए सजा शहर का मुख्य मार्ग रंगबिरंगी रोशनी से जगमगा रहा है। जगह-जगह कांवड़ सेवा शिविर लगाए जा रहे हैं।
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हिंदू क्रांति कारी सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत महेंद्र पुरी महाराज ने बताया कि वह गाजियाबाद स्थित शिव मंदिर में रहते हैं। वह नूपुर शर्मा के लिए 21 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकले हैं। उन्होंने कहा कि देश में एक कानून है। उसी कानून के दायरे में सबको रहना है। ऐसा नहीं है कि फतवा जारी किया और कोई भी हिंदुओं की बहू-बेटियों को कोई नुकसान पहुंचा देगा। बताया कि हरिद्वार क्षेत्र के मंगलौर में चार बाइकों पर सवार कुछ युवकों ने उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस ने उनकी मदद की और सकुशल बॉर्डर पार कराया।
बागपत के गांव रंछाड़ निवासी बाबू खान मुजफ्फरनगर के पुरकाजी से निकल चुके हैं। इससे पहले बाबू खान ने गंगा मैया में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना की और कांवड़ में गंगा जल रखकर बागपत के पुरा महादेव मंदिर के लिए रवाना हो गए। वहीं बाबू खान के सिर पर मुस्लिम टोपी और कंधे पर कांवड़ देखकर लोग हैरान रह गए।
बाबू खान ने बताया कि इस्लाम हमें सभी धर्मों का सम्मान करने की सीख देता है। बताया कि सुबह पांच बजे गांव की मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं और फिर शिव मंदिर पर जाकर साफ-सफाई करते हैं। बाबू खान का कहना है, मैंने इस्लाम धर्म नहीं छोड़ा है, सिर्फ कांवड़ लाने में आस्था है। इसलिए हर साल कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार आता हूं।
वन कुमार बताते हैं कि वह 14 साल से कांवड़ ला रहे हैं। दो साल तक कोरोना काल में कांवड़ यात्रा नहीं हुई थी, लेकिन अब जैसे ही शुरू हुई तो वह फिर गोमुख पहुंच गए। वह कहते हैं कि आदमी को परिस्थितियों से कभी हारना नहीं चाहिए। मैं देश के लिए कांवड़ लाया हूं।