पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला सबसे अहम करवा चौथ व्रत महिलाओं के लिए हमेशा से खास रहा है। सोलह शृंगार कर चांद के दर्शन और पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा को सुहागिनें शिद्दत से निभाने के लिए आतुर रहती हैं। इस बार यह व्रत विशेष होगा। कई साल बाद करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र और मंगल का अमृत योग बन रहा है। यह पिया संग प्रेम को बढ़ाएगा और दांपत्य जीवन में खुशहाली लाएगा।
Karva Chauth आज: सोलह शृंगार कर अपने चांद का दीदार करेंगी सुहागिनें, चंद्र दर्शन से पहले इस विधि से करें पूजन
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मां पार्वती ने रखा था करवाचौथ व्रत
ठाकुरद्वारा मंदिर के पुजारी उमेशचंद कोत्स ने बताया कि हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ का व्रत रखने की शुरुआत मां पार्वती के समय से है। उन्होंने भगवान शिव के लिए इस व्रत को रखा था। इसके बाद महाभारत के दौरान जब अर्जुन तपस्या करने के लिए इंद्रनील पर्वत पर गए हुए थे, तो उनकी पत्नी द्रोपदी को चिंता हुई। कृष्ण के कहने पर द्रोपदी ने भी इस व्रत को रखा था।
कुछ स्थानों पर एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है। बहुत समय पहले वीरावती नाम की एक महिला थी। उसकी शादी सुदर्शन नाम के एक ब्राह्मण से हुई। वीरावती ने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा।
सुदर्शन के भाइयों ने वीरावती का व्रत खंडित करने के लिए आग जलाई और उसे चंद्रमा बोलकर दिखाया। वीरावति ने भी उसे देखकर अपना व्रत खोल दिया। इसके चलते सुदर्शन बीमार रहने लगे। तो देवराज इंद्र की पत्नी वीरावती के पास पहुंची और उन्हें फिर से अखंड व्रत रखने को कहा। वीरावती ने दोबारा व्रत रखा तो उनके पति ठीक हो गए।
चंद्रोदय से पहले करें शिव-पार्वती की पूजा
चंद्रोदय से कुछ समय पहले शिव-पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। चांद निकलने के बाद महिलाएं पति को छलनी में दीपक रखकर देखती हैं और पति के हाथों जल पीकर उपवास खोलती हैं।