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कारगिल विजय दिवस के 20 साल: आज भी दिल में जिंदा हैं राजेश, माता पिता की भर आती हैं आंखें

Fri, 26 Jul 2019 12:54 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 26 Jul 2019 12:54 PM IST
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Kargil Vijay Diwas: Lance Naik Rajesh was martyred in war of 1999 but his memories are still alive
लांस नायक शहीद राजेश बैरागी का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

बीस वर्ष पूर्व कारगिल युद्ध में शहीद हुए सहारनपुर के गांव जेहरा निवासी लांस नायक शहीद राजेश बैरागी आज भी लोगों के दिल में जिंदा हैं। बेटे को याद कर उनके बूढे़ माता पिता की आंखें नम हो जाती हैं। हालांकि शहादत को व्यवस्था भूल चुकी है। शहादत के समय किए गए वादे जिला प्रशासन ने पूरे नहीं किए हैं।

Kargil Vijay Diwas: Lance Naik Rajesh was martyred in war of 1999 but his memories are still alive
कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

एक अगस्त 1968 को गांव जेहरा में ताराचंद बैरागी के घर जन्मे राजेश बैरागी ने आठ सितंबर 1988 में सेना ज्वॉइन की। सात जुलाई 1999 को पैराशूट रेजीमेंट में लांस नायक राजेश बैरागी कारगिल में दुश्मनों से युद्ध कर शहीद हो गए थे। राष्ट्रीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। उस समय जिला प्रशासन ने शहीद राजेश बैरागी के सम्मान में गंगोह के सहारनपुर बस अड्डा चौक पर उनकी प्रतिमा लगाने और गंगोह-वजीरपुर मार्ग का नामकरण भी उनके नाम पर करने की घोषणा की। गंगोह-वजीरपुर मार्ग पर उनके नाम का शिलापट लगा दिया, लेकिन उक्त शिलापट भी लापरवाही के चलते गायब हो चुका है। शहीद के पिता ताराचंद बैरागी, मां कांति देवी और भाई राकेश बैरागी का कहना है कि शहीदों को शासन, प्रशासन एवं नेता चंद दिनों बाद ही भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब तो राष्ट्रीय पर्वों एवं कारगिल दिवस तक पर जिला प्रशासन की ओर से कोई गांव में नहीं आता है।

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शहीद राजेश के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला

गरीबी में जीवन बसर कर रहे माता-पिता 
कारगिल शहीद राजेश बैरागी के वयोवृद्ध एवं अस्वस्थ माता-पिता गरीबी और लाचारी का जीवन जीने को मजबूर हैं। पिता 90 वर्षीय ताराचंद बैरागी और 85 वर्षीय माता कांति देवी ने बताया कि बेटे की शहादत के बाद आरंभ की गई उनकी पेंशन कभी समय से नहीं मिलती है। उन्हें पेंशन के लिए कई महीने इंतजार करना पड़ता है। इसके चलते उन्हें अपनी बीमारी के इलाज के लिए भी उधार लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारियों से इस बात की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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कारगिल युद्ध - फोटो : अमर उजाला

पिता ने गांव में बनवाई शहीद की समाधि 
शहीद राजेश बैरागी के पिता ताराचंद बैरागी ने बेटे की शहादत के बाद गांव में जमीन पर उनका समाधि स्थल बनवाया, इसमें उनकी प्रतिमा भी लगाई गई है। ग्रामीण इसे तीर्थ स्थल मानकर प्रतिवर्ष उनके शहादत दिवस और कारगिल दिवस पर यहां जुटकर नमन करते हैं। क्षेत्र के युवा भी उनसे प्रेरणा लेकर सेना में जाने और राष्ट्र सेवा का संकल्प ले रहे हैं।

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अमर शहीद स्मारक - फोटो : अमर उजाला

बच्चों की खातिर पत्नी ने छोड़ा गांव 
शहीद राजेश बैरागी की पत्नी कमलेश कुछ समय बाद अपने दोनों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर काबिल बनाने के लिए गांव छोड़कर हरियाणा के यमुनानगर चली गई। बेटा रजत कानून की पढ़ाई पूरी करके अब वकालत कर रहा है। बेटी की शादी हो चुकी है।

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