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पत्रकार हत्याकांड: लोग चाहते तो बच जाती दोनों भाइयों की जान, पूरे परिवार को खत्म करने की थी साजिश

Mon, 19 Aug 2019 06:53 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 19 Aug 2019 06:53 PM IST
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पत्रकार आशीष व आशुतोष - फोटो : अमर उजाला

सहारनपुर में सोमवार को दिनदहाड़े हुए दोहरे हत्याकांड के दौरान तमाशबीन बनी भीड़ यदि चाहती तो पत्रकार आशीष और उसके भाई आशुतोष की जान बच सकती थी। चंद लोगों ने जान पर खेलकर बीच बचाव करने का प्रयास भी किया, जो नाकाफी रहा।



नतीजन एक परिवार के दो जवान बेटे हमेशा के लिए खामोश हो गए। वहीं हत्यारोपी का इरादा पूरे परिवार को खत्म करने था। वारदात को अंजाम देकर वह अपने बेटे के साथ फरार हो गया। 

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मौके पर मौजूद पुलिस बल - फोटो : अमर उजाला

घटना रविवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रविवार की सुबह आशीष की मां उर्मिला ने घर के बाहर की सफाई कर कचरा अपने घर के सामने सड़क किनारे लगाया था, जिसको लेकर सड़क के दूसरे छोर पर रहने वाले महिपाल सैनी ने उर्मिला को गाली देते हुए कचरा हटाने को कहा था, जबकि आरोपी का घर सड़क की दूसरी तरफ था।

गाली सुनकर आशुतोष बाहर आया और गाली नहीं देने की बात महिपाल को कही। आरोप है कि इस पर पहले से तैयार महिपाल ने अपने बेटों के साथ मिलकर आशुतोष पर हमला कर दिया और उसका सिर फोड़ दिया। 

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मृतक आशुतोष - फोटो : अमर उजाला

मां के चिल्लाने की आवाज सुनकर आशीष बाहर आया तो हमलावरों ने उसे भी घेर लिया और सबसे पहले ठंडे से सिर पर वार किया। इसके बाद दोनों भाई अपने मकान में चले गए, तो मकान में घुसकर आरोपियों ने गोलियां मार दीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर काफी लोग जमा थे। जो केवल तमाशबीन बने हुए थे। 

चंद लोगों ने बीच बचाव करने का प्रयास किया, जिनके पीछे भी महिपाल तमंचा लेकर दौड़ा। यह भी बताया गया है कि कुछ लोग घटना में बीच बचाव करने की बजाय अपने मोबाइल से वीडियो बना रहे थे। हालांकि, घटना से जुड़ा कोई वीडियो अभी तक सामने नहीं आया है। यदि भीड़ चाहती तो आशीष और उनके भाई को मरने और उर्मिला का परिवार उजड़ने से बचाया जा सकता था। 

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पत्रकार आशीष - फोटो : अमर उजाला

पुलिस के सामने से फरार हो गए आरोपी 
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वारदात के बाद जब पुलिस को सूचना दी गई, तो दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए थे। इनके सामने ही आरोपी मौके से फरार हुए। बाद में थाने से पुलिसकर्मी आए और फिर लहूलुहान आशीष और आशुतोष को जिला अस्पताल भिजवाया। इसके बाद जब दोनों की मौत हो गई और मौके पर भीड़ इकट्ठा होकर हंगामा कर रही थी, तब भी लोग यही कह रहे थे कि पुलिस वालों के सामने से ही आरोपी फरार हुए।

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मृतक पत्रकार के परिजन विलाप करते हुए - फोटो : अमर उजाला

पूरे परिवार को खत्म करने की थी साजिश
आशीष और उसके भाई को ही नहीं हमलावरों की मंशा पूरे परिवार को खत्म करने की थी। जिस प्रकार से पुलिस तलाशी में हमलावरों का मकान खाली मिला है, उससे स्पष्ट है कि आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी।

रविवार की सुबह हुई घटना में पत्रकार आशीष कुमार और उनके छोटे भाई गोरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मगर हमलावरों की मंशा केवल दोनों भाइयों की हत्या करना नहीं था, बल्कि पूरे परिवार का खात्मा करना चाहते थे। 

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