मेरठ में आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर को विजिलेंस विभाग की टीम ने सोमवार को 66 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। आरोपी इंस्पेक्टर को कोतवाली थाने को सौंपते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
घूसखोरी: विजिलेंस टीम का खुलासा, गिरफ्तार इंस्पेक्टर की लखनऊ तक पहुंच, ऊपर भी जाती थी रिश्वत
- आबकारी विभाग का इंस्पेक्टर घूसखोरी में गिरफ्तार
- विजिलेंस ने की कार्रवाई, कोतवाली में केस दर्ज
जिसकी शिकायत ठेकेदार अनुज शर्मा ने विजिलेंस विभाग में की थी। इसके बाद विजिलेंस टीम ने उसे घेरने के लिए कार्रवाई शुरू की। रिश्वत का पैसा देने के लिए अनुज शर्मा को आबकारी इंस्पेक्टर ने ईव्ज चौराहा स्थित अपने कार्यालय में बुलाया था, जहां अनुज के रिश्वत देते ही विजिलेंस टीम ने आबकारी इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया।
विजिलेंस टीम के साथ एंटी करप्शन और सदर तहसीलदार भी मौजूद रहे। सूचना पर कोतवाली थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
ऊपर तक जाती थी रिश्वत
विजिलेंस टीम के अनुसार आरोपी इंस्पेक्टर ने पूछताछ में बताया कि देहात के शराब के ठेकों से वसूली करने के बाद ऊपर तक बांटी जाती थी। उसकी ऑडियो भी पीड़ित ठेकेदार ने विजिलेंस को सौंपी है। पीड़ित ने बताया कि उसने कई बार रिश्वत देने से मना किया, इसके बावजूद भी इंस्पेक्टर ने नहीं सुनी। इसको लेकर कई बार बहस भी हुई।
आबकारी एसोसिएशन का अध्यक्ष है अतुल
रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार आबकारी इंस्पेक्टर अतुल त्रिपाठी एसोसिएशन का अध्यक्ष भी है। विजिलेंस के हाथ लगी कुछ फोटो के हिसाब से अतुल की पहुंच सीधे ऊपर तक पता चलती है। हालांकि अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष होने के कारण अतुल का अक्सर लखनऊ जाना रहता था।
कोरोना काल के दौरान विभागीय मंत्री ने कोविड-19 फंड में 50.25 लाख का चेक मुख्यमंत्री को सौंपा था। इस दौरान फोटो में आबकारी निरीक्षक अतुल त्रिपाठी के अलावा कुछ और लोग भी दिखाई दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि विजिलेंस को कुछ और आबकारी निरीक्षकों की भी शिकायत मिली है। इनमें मेरठ के भी आबकारी निरीक्षक शामिल हैं।
हर माह पांच हजार देनी होगी रिश्वत
पुलिस के अनुसार आरोपी आबकारी प्रत्येक ठेके से पांच हजार की रिश्वत प्रतिमाह लेता था, जो कोरोना काल में भी जारी रही। ठेकेदार से मई से नवंबर तक के 66 हजार रुपये लिए गए, जिसकी शिकायत आबकारी अधिकारियों से करने के बावजूद भी सुनवाई नहीं हुई थी।
पूछताछ के दौरान आरोपी इंस्पेक्टर ने एक बड़े अधिकारी का नाम लिया तो खलबली मच गई। ठेकेदार ने भी बताया कि आरोपी इंस्पेक्टर यह कहकर ही पैसा मांगता था कि रिश्वत का पैसा ऊपर अधिकारियों तक बांटा जाता है।