70 लाख का गबन करने के आरोपों में फंसी इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान को गाजियाबाद पुलिस ने 44 दिनों की पूरी छूट दी। नामजद पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने के बजाय कागजों में ही दबिश दी जाती रही। लेकिन भ्रष्टाचार के साये ने पीछा नहीं छोड़ा। आखिरकार महिला इंस्पेक्टर को गुरुवार को अदालत में आत्मसमर्पण करना ही पड़ा। हालांकि इस दौरान इंस्पेक्टर कचहरी में मुस्कराती रहीं और बार-बार बोलती रहीं कि जल्दी करो, मुझे जेल भेज दीजिए। पूरे प्रकरण को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगा है।
कचहरी में मुस्कराती रहीं इंस्पेक्टर... बोली- जल्दी मुझे जेल भेजो, काम नहीं आई साथियों की मदद
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क्या था मामला
साहिबाबाद साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र स्थित सीएमएस इंफो सिस्टम कंपनी एटीएम में कैश लोड करने का काम करती है। कंपनी ने 22 अप्रैल को गाजियाबाद के लिंक रोड थाने में कंपनी के कैश कस्टोडियन एजेंट राजीव सचान के खिलाफ करीब 72.50 लाख रुपये गबन का मामला दर्ज कराया था, जो जांच में 3.50 करोड़ रुपये का निकला। गाजियाबाद के लिंक रोड थाने की तत्कालीन इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान ने पुलिस टीम के साथ 24 सितंबर को राजीव सचान को साथी आमिर के साथ गिरफ्तार कर उनसे 1.15 करोड़ रुपये बरामद किए। लेकिन इस बीच नोटों से भरा एक बैग गायब कर दिया गया। जबकि थाने की बरामदगी फर्द में महज 45 लाख 81 हजार 500 रुपये की बरामदगी ही दिखाई। इस मामले में आईजी रेंज आलोक सिंह के निर्देश पर 25 सितंबर को इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान, दरोगा नवीन कुमार और बच्चू सिंह, फराज खान, धीरज भारद्वाज, सौरभ शर्मा, सचिन कुमार सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ 60-70 लाख रुपये गबन करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में एक पुलिसकर्मी गवाह बन गया था।
अन्य आरोपियों की सरेंडर अर्जी खारिज
सीनियर अधिवक्ता जगदीश पावटी के मुताबिक इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह समेत सभी आरोपी पुलिसकर्मियों ने सरेंडर अर्जी लगाई थी। लेकिन लक्ष्मी सिंह व सिपाही धीरज भारद्वाज ने ही आत्मसमर्पण किया। एडीजीसी सिराजुद्दीन अलवी ने बताया कि न्यायालय एडीजे/स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम इरफान कमर ने अन्य आरोपी पुलिसकर्मियों की सरेंडर अर्जी को खारिज कर दिया है।
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किरकिरी हुई, गिरफ्तारी नहीं
भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पुलिस की भी किरकिरी हुई। गाजियाबाद पुलिस आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश देने के दावे करती रही। इस बीच इंस्पेक्टर ने मेरठ से लेकर हाईकोर्ट तक अग्रिम जमानत याचिका लेने की कोशिश की। लेकिन गंभीर आरोपों को देखते हुए न्यायालय ने कोई राहत नहीं दी और याचिका खारिज कर दी। एसएसपी गाजियाबाद ने फरार इंस्पेक्टर समेत पुलिसकर्मियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम कर उनके घर पर कुर्की वारंट चस्पा भी कराए। उसके अगले ही दिन गुरुवार को इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह और सिपाही धीरज भारद्वाज ने आत्मसमर्पण कर दिया।
मुस्कराती रहीं इंस्पेक्टर...
आरोपी इंस्पेक्टर कचहरी में भी मुस्कराती रहीं। बार-बार बोलती रहीं कि जल्दी करो, मुझे जेल भेज दीजिए। आरोप लगाने वाली पुलिस को अब कोर्ट में जवाब देंगे। सिपाही धीरज भारद्वाज को ढांढस बंधाती रहीं कि डरो मत, इंसाफ मिलेगा।
पांच वीडियो हैं, अब देंगे
आरोपी इंस्पेक्टर के अधिवक्ता जगदीश पावटी ने बताया कि उनके पास भी पांच वीडियो हैं। इसमें इंस्पेक्टर पर लगाए गए आरोप गलत साबित होंगे। पुलिस ने आरोपियों से कैसे इंस्पेक्टर के खिलाफ सबूत जुटाए, इसको कोर्ट में साबित करेंगे। पांचों वीडियो को वायरल किया जाएगा।
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