प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में जिले के 33746 लाभार्थी परिवार दोबारा गैस का सिलिंडर नहीं भरवा पाए हैं। आर्थिक तंगी के चलते इन परिवारों को चूल्हे पर ही रोटी बनाने के लिए विवश होना पड़ा है। मुजफ्फरनगर में उज्ज्वला योजना में अब तक 84,365 परिवारों को गैस का कनेक्शन दिया जा चुका है। 40 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं, जो गरीबी के कारण दोबारा गैस का रिफिल नहीं ले पाए हैं। इन घरों में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में मिला सिलिंडर और चूल्हा शोपीस बनकर रह गया है।
यूपी: 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' कितनी सफल, तस्वीरों के साथ एक क्लिक में जानिए
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ग्रामीण अंचल के गरीब परिवारों की महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में आर्थिक तंगी आडे़ आ रही है। अत्यंत गरीब परिवारों को योजना के तहत कनेक्शन दिया गया। हालांकि अधिकतर जरूरतमंद परिवार दोबारा गैस नहीं खरीद पाए। रिफिल का रेट उनके हिसाब से इतना महंगा है कि उसे वह वहन नहीं कर सकते। चूल्हे में जलाई जाने वाली लकड़ी इन परिवारों को मुफ्त में मिल जाती है।
पशुओं के पालने के कारण उपले भी परिश्रम कर मुफ्त में बना लेते हैं। जिले में 31 दिसंबर 2017 तक 78,692 परिवारों को कनेक्शन का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 60,870 परिवारों को योजना में कनेक्शन दिए गए। 2017-18 में जिले में 32,470 कनेक्शन प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में देने का टारगेट है। इसमें अब तक 23,495 लाभार्थी परिवारों को कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब तक कुल 84,365 परिवारों को उज्ज्वला योजना में लाभ दिया जा चुका है। योजना के लाभार्थी 40 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने दोबारा गैस नहीं ली है। 33,746 परिवारों में गैस का चूल्हा और सिलिंडर शोपीस बनकर रह गया है। दोबारा सिलिंडर नहीं लेने वालों में ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थी अधिक हैं।
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गरीबों तक पहुंचा रहे लाभ: अभिषेक
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना को लेकर जिले के नोडल ऑफिसर बनाए गए अभिषेक कुमार ने बताया कि योजना का लक्ष्य प्रत्येक गरीब परिवार को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना है। रिकॉर्ड में 40 प्रतिशत लोग ऐसे सामने आए हैं, जिन्होंने दूसरा सिलिंडर नहीं लिया है। इन लोगों को जागरूक करने और दोबारा रिफिल खरीदने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
चूल्हे के 990 रुपये जमा करने होंगे
उज्ज्वला योजना का प्रावधान है कि जिस गरीब परिवार की सदस्य महिला को मुफ्त में कनेक्शन मिलेगा। उसको चूल्हे के 990 रुपये संबंधित गैस एजेंसी में जमा कराने होंगे। अगर वह महिला चूल्हे के पैसे जमा करने के सक्षम नहीं है तो, उसका गैस कनेक्शन पर ऋण लागू कर दिया जाता है। इस ऋण के तहत कंज्यूमर को मिलने वाली सब्सिडी में से प्रतिमाह चूल्हे की कीमत लेने के लिए 210 रुपये 66 पैसे काट लिए जाएंगे। योजना के तहत जब तक कंज्यूमर से चूल्हे के 990 रुपये वसूल नहीं कर लिए जाएंगे, तब तक उसको सब्सिडी का पैसा नहीं मिलेगा। गैस सिलिंडर की कीमत 704 रुपये 50 पैसे है।