भाजपा सांसद ने चार साल पहले एक गांव को गोद लिया था। सांसद ने दावा किया था कि गांव को धुआं रहित बनाया जाएगा। लेकिन जब अमर उजाला की टीम गांव में जायजा लेने पहुंची तो सच्चाई हैरान करने वाली थी। आगे तस्वीरों में जानिए यूपी के इस गांव का हाल...
ग्राउंड रिपोर्ट: सांसद के गोद लिए गांव ने खोल दी 'उज्ज्वला योजना' की पोल, देखें तस्वीरें
मेरठ में चार साल पहले सांसद राजेंद्र अग्रवाल द्वारा गोद लिए गांव भगवानपुर चट्टावन का हाल बेहाल है। सरकारी रिकॉर्ड में लोगों को सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ दिया गया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। उज्ज्वला योजना के तहत गांव में 85 प्रतिशत लोगों को गैस कनेक्शन दिए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि यहां पर अब खाना चूल्हे पर नहीं बनता। लेकिन वर्तमान में 70 प्रतिशत लोगों के घरों में चूल्हे जल रहे हैं।
मंगलवार को अमर उजाला टीम ने गांव में उज्ज्वला योजना की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। जिसमें व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आयी। सरकार के इस आदर्श गांव में सभी परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं है, और न ही गैस कनेक्शन हैं। गांव के कई परिवार तो कच्चे मकान में पॉलिथीन डालकर ही रात गुजारते हैं।
ये गैस कनेक्शन
साधारण गैस कनेक्शन - 365
उज्ज्वला गैस कनेक्शन - 86
उज्ज्वला प्लस गैस कनेक्शन - 6
ये है उज्ज्वला प्लस योजना
उज्ज्वला प्लस योजना एक अप्रैल से संचालित है। इस योजना में अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को ही निशुल्क गैस कनेक्शन दिए जा सकते हैं। इसके लिए परिवार की महिला मुखिया का जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड की फोटो कॉपी, बैंक खाता संख्या, पति पत्नी दोनों के आधार कार्ड और महिला मुखिया के दो फोटो लगते हैं। इस योजना में पिछड़ी जाति, विकलांग परिवार को नहीं लिया गया है। जिस कारण ये परिवार चूल्हे पर ही खाना बनाने को मजबूर हैं।
नहीं हैं राशन कार्ड, कैसे मिले योजना का लाभ
सरकार भले ही प्रत्येक परिवार को उज्ज्वला योजना का लाभ देने की बात करती हो, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। राशन कार्ड से इस योजना का लाभ पात्र को दिया जाता है, लेकिन इस गांव के अधिकांश परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं हैं। गांव की शबाना, राजू, मोसीना, गुलफशा आदि ने बताया कि 30-40 परिवार ऐसे हैं जिनके आज तक राशन कार्ड नहीं बनवाए गए हैं। कई बार प्रधान से इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।